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उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने द स्टोरी ऑफ किंग भोरमदेव 'राजा भोरमदेव की कहानी' पुस्तक का किया विमोचन
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 2 फरवरी 2026,  07:41 PM IST
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उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने द स्टोरी ऑफ किंग भोरमदेव 'राजा भोरमदेव की कहानी' पुस्तक का किया विमोचन

रायपुर। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आज विधायक कार्यालय कवर्धा में द स्टोरी ऑफ किंग भोरमदेव 'राजा भोरमदेव की कहानी' पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक के रचनाकार रामप्रसाद बघेल को उप मुख्यमंत्री ने बधाई तथा आगे के सफल साहित्यिक कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं। श्री शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक जिलेवासियों के लिए गर्व का विषय है तथा इससे हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराओं को नयी पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। यह कहानी अंर्तराष्ट्रीय स्तर का है इस पुस्तक के प्रकाशन से भोरमदेव की ख्याति को अंर्तराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। 
         उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पुस्तक न केवल राजा भोरमदेव के जीवन और काल की महिमा को उजागर करता है, बल्कि मनुष्य, प्रकृति और चेतना के बीच संतुलन की गूढ़ दार्शनिकता को भी बखूबी प्रस्तुत करता है। उन्होंने आग्रह किया कि वे इस पुस्तक को पढ़ें और इसके संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करें।
-लेखक रामप्रसाद बघेल ने बताया कि 
'राजा भोरमदेव की कहानी' की शुरुआत एक प्राचीन और रहस्यमयी युग से होती है, जब पृथ्वी पर आकाश से गिरा एक विशाल धूमकेतु ने न केवल प्राकृतिक संतुलन को बाधित किया, बल्कि अंधकार से ऊर्जा प्राप्त करने वाले ड्रैगन जैसे घातक प्राणियों का आगमन भी किया। ये प्राणी अंधकार में और अधिक शक्तिशाली होते गए तथा धीरे-धीरे संपूर्ण पृथ्वी को एक भयावह अनंत संध्या की ओर ले जाने लगे, जहाँ मानव, पशु और प्रकृति कोई भी सुरक्षित नहीं रहा। कथा का प्रमुख नायक कुरुगुरु भद्रदेव बैगा है, जो विज्ञान, अध्यात्म एवं प्रकृति के संतुलन को समझता है। विद्वानों के नेतृत्व में यह खोज की जाती है कि ड्रैगनों के माथे पर चमकता नीला चिह्न कोई सजावट नहीं, बल्कि अंधकार से ऊर्जा खींचने वाला यंत्र है, और जैसे-जैसे अंधकार बढ़ता है, वे और अधिक अजेय बनते जाते हैं।
कहानी में एक प्राचीन राजवंश के शासक राजा परसमनिधर देव तथा रानी नागमती की गहन तपस्या और दिव्य-वैज्ञानिक शक्तियों का विवरण भी मिलता है। राजा के पास पारस रत्न है, जो सूर्य की ऊर्जा से पदार्थ और जीवन को रूपांतरित करने की क्षमता रखता है, जबकि रानी नागमती के पास नागमणि यंत्र है, जो किसी भी पदार्थ को नष्ट करने अथवा विष को निष्प्रभावी बनाने की शक्ति रखता है। कहानी केवल युद्ध और संघर्ष की नहीं है, बल्कि प्रेम, नियति एवं चेतना की भी है। झील के तट पर बिना शब्दों के केवल दृष्टियों और अनुभूतियों से राजा और रानी का प्रेम जन्म लेता है। उनका विवाह दो शक्तिशाली वंशों का नहीं, बल्कि विज्ञान, प्रकृति और चेतना के मिलन का प्रतीक बनता है। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विदेशीराम धुर्वे, संतोष पटेल, जनपद उपाध्यक्ष कवर्धा गणेश तिवारी, बोडला नंद श्रीवास, नरेंद्र मानिकपुरी, मनीराम साहू, अमर कुर्रे, प्रवीण शर्मा, जसबीर सालुजा, शैलेन्द्र उपाध्याय सहित जन प्रतिनिधि, क्षेत्र के नागरिक उपस्थित रहे।


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