• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
व्यपार और भी
स्व-सहायता समूह एवं बैंक लिंकेज के माध्यम से हेमलता साहू द्वारा सफल उद्यम की स्थापना
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 4 फरवरी 2026,  11:45 AM IST
  • 409
स्व-सहायता समूह एवं बैंक लिंकेज के माध्यम से हेमलता साहू द्वारा सफल उद्यम की स्थापना

सफलता की कहानी

दुर्ग/ ग्राम ननकट्टी, जनपद पंचायत दुर्ग की हेमलता साहू ने यह साबित कर दिया है कि सही दिशा में किया गया छोटा सा प्रयास भी जीवन में बड़ी सफलता ला सकता है। हेमलता दीदी आराध्या स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई थी।

हेमलता दीदी के पति श्री चेतन लाल साहू निर्माण सामग्री और फेब्रिकेशन का छोटा व्यवसाय चला रहे थे, लेकिन पूंजी की कमी के कारण व्यवसाय को आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा था। इस परिस्थिति को समझते हुए हेमलता दीदी ने आराध्या स्व-सहायता समूह के माध्यम से पहला 60 हजार रूपए और फिर बैंक लिंकेज से एक लाख 43 हजार का ऋण लिया। इन राशि का उपयोग उन्होंने अंबुजा सीमेंट की डीलरशिप लेने में किया। इससे न केवल उन्हें अपने क्षेत्र में 15 किलोमीटर तक सीमेंट सप्लाई करने का काम मिलने लगा। व्यवसाय में तेजी से वृद्धि भी होने लगी। बिहान योजना से सामुदायिक निवेश कोष से लोन प्राप्त कर अपना व्यवसाय को और आगे बढ़ाया।

उन्होंने समूह के माध्यम से और बैंक लिंकेज से दो लाख का ऋण लिया और सीमेंट, सरिया, गिट्टी, रेत और फेब्रिकेशन के लिए कच्ची सामग्री खरीदी। आज उनका वार्षिक टर्नओवर 50 लाख रूपए तक पहुँच चुका है, और लगभग 10 प्रतिशत लाभ मार्जिन के साथ वह प्रति वर्ष 5 लाख शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। 

हेमलता दीदी न केवल अपने पति के व्यवसाय की रीढ़ बनीं, बल्कि इसे एक सफल उद्यम में बदलकर अपने ग्रामीण क्षेत्र में निर्माण सामग्री की आपूर्ति करने लगीं। आज वह ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत और जनपद के निर्माण कार्याे, विशेषकर प्रधानमंत्री आवास योजना में निर्माण सामग्री की आपूर्ति कर रही है। साथ ही 4-5 लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया। आर्थिक रूप से मजबूत बनने के साथ ही उन्होंने अपने बच्चों को भी बेहतर शिक्षा दिलाई। बेटी भारती यूनिवर्सिटी में बीएससी और बेटा पारिवारिक व्यवसाय को बढ़ाने के लिए एमबीए की तैयारी कर रही है।

RO. NO 0002
RO. NO 13843/ 27

RO. NO 0002
RO. NO 13843/ 27

Add Comment


Add Comment

RO. NO 0002
676140620261012371007869232.jpg
RO. NO 13843/ 27
287060520260449541007062156.jpg
RO. NO 13843/ 27
921060520260450131007062156.jpg
RO. NO 0002
676140620261012371007869232.jpg
RO. NO 13843/ 27
287060520260449541007062156.jpg
RO. NO 13843/ 27
921060520260450131007062156.jpg





Get Newspresso, our morning newsletter