मध्यप्रदेश। ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने मामले को अब जबलपुर हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया है। सभी याचिकाओं की सुनवाई अब मध्यप्रदेश के जबलपुर हाई कोर्ट में नए सिरे से होगी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 13 परसेंट आरक्षण पर अंतरिम रोक बरकरार रखी है। इसकी संवैधानिकता और कानूनी वैधता की जांच हाई कोर्ट करेगी।
मामला कानूनी दांव-पेंच में फंसा
मध्यप्रदेश में पहले ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत था जिसे 13 परसेंट बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया था। यह मामला कानूनी दांव-पेंच में फंसा हुआ है। पहले मामला हाई कोर्ट में था लेकिन सरकार इसे सुप्रीम कोर्ट लेकर गई। अब सुप्रीम कोर्ट ने इसे वापस हाई कोर्ट को भेज दिया है।
2019 में दिया था 27% आरक्षण
ओबीसी वेलफेयर कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत की मांग की थी लेकिन अब मामले पर फैसला हाई कोर्ट द्वारा किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि, यह केस राज्य के कानून और संवैधानिक सीमाओं से जुड़ा है इसलिए अंतिम फैसला हाई कोर्ट को ही लेना चाहिए। साल 2019 में ऑर्डिनेंस के माध्यम से ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किया गया। इसके खिलाफ मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई थी।
एमपी किस वर्ग को कितना मिला आरक्षण
बता दें कि, मध्यप्रदेश में 20 प्रतिशत आरक्षण एसटी वर्ग को मिला है। एससी वर्ग के लिए आरक्षण 14 प्रतिशत है। इसके अलावा ओबीसी को एमपी में 14 प्रतिशत आरक्षण और EWS वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण मिला था। इस तरह मध्यप्रदेश में कुल आरक्षण 58 प्रतिशत हो गया। सुप्रीम कोर्ट के ही फैसले के अनुसार आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत करने से कुल आरक्षण 71 प्रतिशत हो गया। इसी कारण मामला अदालत में है और अब हाई कोर्ट इसकी संवैधानिकता तय करेगा।
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