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घरेलू गैस सिलेंडर 60 और कमर्शियल 115 रुपये महंगा, सरकार ने जारी किया 'इमरजेंसी
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 7 मार्च 2026,  10:16 AM IST
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घरेलू गैस सिलेंडर 60 और कमर्शियल 115 रुपये महंगा, सरकार ने जारी किया 'इमरजेंसी

नई दिल्ली : ईरान-इजरायल युद्ध के वैश्विक असर के कारण भारतीय रसोई पर महंगाई की मार पड़ी है। केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये और 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपये का बड़ा इजाफा कर दिया है। नई कीमतें 7 मार्च, 2026 से प्रभावी हो गई हैं। इस बीच, खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के चलते गैस की संभावित किल्लत को देखते हुए सरकार ने 'इमरजेंसी पावर' का इस्तेमाल करते हुए सभी रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का कड़ा निर्देश दिया है।

दिल्ली में अब 913 रुपये का मिलेगा घरेलू सिलेंडर

​ताजा बढ़ोत्तरी के बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गई है। वहीं, व्यवसायिक इस्तेमाल वाला 19 किलो का सिलेंडर अब 1883 रुपये में मिलेगा, जो पहले 1768 रुपये का था। कीमतों में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण ईंधन की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

'स्टेट ऑफ हॉर्मुज' बंद होने से सप्लाई पर संकट

​भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय 'स्टेट ऑफ हॉर्मुज' जलमार्ग का लगभग बंद होना है। ईरान जंग के कारण यह 167 किमी लंबा रूट अब सुरक्षित नहीं रह गया है और कोई भी तेल टैंकर यहाँ से गुजरने का जोखिम नहीं उठा रहा है। गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। हॉर्मुज रूट के ठप होने से कतर, कुवैत और इराक जैसे देशों से होने वाला आयात रुक सकता है।

​कतर में एलएनजी (LNG) उत्पादन रुकने से घटी सप्लाई

​सप्लाई संकट की दूसरी बड़ी वजह पिछले हफ्ते ईरान द्वारा किए गए ड्रोन हमले हैं। अमेरिका-इजरायल की स्ट्राइक के जवाब में ईरान ने यूएई, कतर और सऊदी में अमेरिकी ठिकानों व पोर्ट्स को निशाना बनाया, जिसके बाद कतर ने अपने एलएनजी प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया है। भारत अपनी जरूरत की 40% एलएनजी (करीब 2.7 करोड़ टन सालाना) अकेले कतर से आयात करता है, जिससे घरेलू बाजार में गैस की किल्लत की संभावना बढ़ गई है।

​रिफाइनरियों को रसोई गैस उत्पादन बढ़ाने का 'इमरजेंसी' आदेश

​गैस की किल्लत रोकने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (ESMA) 1955 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आदेश जारी किया है। अब सरकारी तेल कंपनियां प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का इस्तेमाल केवल रसोई गैस बनाने के लिए ही कर सकेंगी।

इससे पेट्रोकेमिकल बनाने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी निजी कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है, क्योंकि इन गैसों का डायवर्जन एलपीजी उत्पादन की ओर किया जा रहा है।

​रूस पर निर्भरता और पर्याप्त स्टॉक की राहत

​चुनौतीपूर्ण हालातों के बावजूद सरकार ने जनता से घबराने की जरूरत नहीं होने की अपील की है। भारत अब अपनी जरूरत का 20% कच्चा तेल रूस से मंगा रहा है, जिससे हॉर्मुज रूट पर निर्भरता कुछ कम हुई है। देश के पास वर्तमान में पेट्रोलियम और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और रिफाइनरियों के बंद होने की खबरें महज अफवाह हैं।

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