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व्यपार और भी
महायुद्ध का एक सप्ताह 1200 मौतें, 11,000 उड़ानें रद्द और आसमान छूती तेल की कीमतें
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 7 मार्च 2026,  10:42 AM IST
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एक सप्ताह के युद्ध में 1200 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें 165 ईरानी छात्राएं और शीर्ष नेतृत्व शामिल है।

नई दिल्ली : अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध को एक सप्ताह पूरा हो चुका है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस सैन्य संघर्ष ने पूरे मध्य पूर्व को दहला कर रख दिया है।

एक तरफ जहां अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने का दावा किया है, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने भी जवाबी हमले जारी रखे हैं। सात दिनों के इस घटनाक्रम ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, हवाई यात्रा और ऊर्जा आपूर्ति को गहरे संकट में डाल दिया है।

​तबाही का मंजर

​युद्ध के पहले ही दिन अमेरिका के 'एपिक फ्यूरी' और इजरायल के 'रोअरिंग लायन' ऑपरेशन के तहत ईरान के सरकारी ठिकानों पर भीषण मिसाइल हमले किए गए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत हो गई। हालांकि, इस युद्ध की सबसे दर्दनाक तस्वीर मीनब के एक स्कूल से आई, जहां मिसाइल हमले में 165 स्कूली छात्राओं की जान चली गई। अब तक ईरान में मरने वालों की संख्या 1200 के पार पहुँच चुकी है।

​हवाई यात्रा पर ब्रेक: 11,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द

​इस युद्ध का सबसे बड़ा और तात्कालिक असर अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा पर पड़ा है। खाड़ी देशों द्वारा अपने हवाई क्षेत्र बंद किए जाने के कारण अब तक 11,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे प्रमुख ट्रांजिट हब पूरी तरह प्रभावित हैं। हालांकि, पिछले दो दिनों में कुछ एयरलाइनों ने केवल निकासी अभियानों के लिए सेवाएं बहाल की हैं, लेकिन आम यात्रियों के लिए संकट बरकरार है।

​ऊर्जा संकट: तेल की कीमतों में 10% का उछाल

​ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बंद कर दिया है, जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। इस कदम ने वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में 10% से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई है, जो 2024 के बाद के उच्चतम स्तर पर है। इसके साथ ही यूरोप और एशिया में प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी भारी उछाल आया है, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ गया है।

​भारत पर प्रभाव और अमेरिकी छूट

​युद्ध का असर भारत के करीब तक पहुँच गया है जब हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत को अमेरिका ने डुबो दिया, जिसमें 87 नाविक मारे गए। इस संकट के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को राहत देते हुए रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट दी है।

अमेरिका ने यह भी घोषणा की है कि वह तेल टैंकरों को सुरक्षा देने के लिए 'नौसैनिक एस्कॉर्ट' और राजनीतिक जोखिम बीमा प्रदान करेगा ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह न टूटे।

​युद्ध का भविष्य: कौन जीत रहा है और कब थमेगा संघर्ष?

​इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान की 80% वायु रक्षा प्रणालियों को नष्ट कर दिया है और उसे "पूर्ण वायु श्रेष्ठता" प्राप्त है। वहीं, ईरान ने सस्ते 'कामिकेज़' ड्रोन्स के जरिए इजरायल और खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले युद्ध के 2-3 दिनों में खत्म होने की उम्मीद जताई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 4 सप्ताह कर दिया गया। फिलहाल, दोनों पक्षों की ओर से पीछे हटने के कोई संकेत नहीं हैं, जिससे एक लंबी और भयावह जंग का अंदेशा बना हुआ है।

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