रायपुर। रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र में ग्राम निसदा में संचालित सभी 7 फर्शी खदानों का ठेका जिला प्रशासन ने निरस्त कर दिया है। इस संबंध में कलेक्टर गौरव सिंह ने 3 मार्च को आदेश जारी किया है। इन फर्शी खदानों में जहां नियमों के विरुद्ध उत्खनन का काम कर शासन को हर साल करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर महानदी का भी अस्तित्व खतरे में आ गया था, क्योंकि इन खदानों से निकलने वाले वेस्ट मटेरियल को महानदी में फेका जा रहा था, जिससे नदी के किनारे पटने से उसकी चौड़ाई भी कम होती जा रही थी। हरिभूमि ने लाइव रिपोर्टिंग कर इसकी प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इस खबर के बाद हाईकोर्ट ने भी इसे अपने संज्ञान में लिया था, वहीं अब इस मामले में जिला प्रशासन ने सभी खदानों का ठेका अनुबंध को निरस्त कर दिया है।
सैकड़ों पेड़-पौधे भी वेस्ट पत्थरों के नीचे दबकर नष्ट हो चुके
इन खदानों से निकलने वाले वेस्ट पत्थरों के कारण नदी और खदानों के आसपास लगे हरे-भरे सैकड़ों पेड़-पौधे भी नष्ट हो चुके हैं। इससे इस क्षेत्र के साथ नदी के किनारे की हरियाली खत्म हो चुकी है। इससे इस क्षेत्र के साथ नदी के किनारे की हरियाली खत्म हो चुकी है।
बंद करने के आदेश के बाद भी खनन जारी रहा
प्रशासन ने ठेका निरस्त करने से पूर्व इन सभी खदानों को बंद करने का आदेश जारी किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए पट्टेदारों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे कि 30 दिनों के भीतर इस मामले में पुनः जांच कराकर निर्णय स्वयं निर्णय ले। हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद भी निर्धारित समय में इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया जा सका, जिसका फायदा कुछ पट्टेदारों ने उठाया और खदानों में अवैध रूप से करीब दो महीने तक उत्खनन जारी रखा।
होली के बाद से खनन बंद: होली त्यौहार के समय से इन
खदानों में उत्खनन बंद हैं। अब इस मामले में प्रशासन ने सातों खदानों का ठेका ही निरस्त कर दिया है। इस तरह इसके बाद भी अगर यहां उत्खनन हुआ तो खनिज विभाग अब यहां सख्त कार्रवाई करेगा।
खनिज विभाग दो बार पर्यावरण विभाग को लिख चुका है पत्र
खनिज विभाग के अधिकारियों ने बताया कि महानदी को वेस्ट पत्थरों से पाटे जाने और पेड़ों को क्षति पहुंचाने संबंधी मामले में उचित जांच कर कार्रवाई करने के लिए पर्यावरण विभाग को दो बार पत्र लिख चुका है। इसके बाद भी इस मामले में अब तक उनके द्वारा कोई भी जांच या कार्रवाई नहीं की जा रही है।
पट्टेदारों के विरुद्ध बनाया 30 करोड़ 40 लाख का प्रकरण
ग्राम निसदा में संचालित फर्शी खदानों को 30 वर्षों के लिए अलग-अलग वर्ष एवं तारीख में उत्खनन के लिए पट्टेदारों को ठेके पर दिया गया था, लेकिन इन फर्शी खदानों में नियमों के विरुद्ध उत्खनन कराया जाना पाया गया। महानदी में वेस्ट मटेरियल फेके जाने के बाद उठे इस मामले में जिला प्रशासन के निर्देश पर खनिज विभाग ने जांच कराई गई थी। इस जांच में पाया गया कि उत्खनन के लिए पट्टेदारों को जिस खसरा नंबर की जमीन निर्धारित रकबा हेक्टेयर में खनन किया जाना था, उससे कहीं ज्यादा हेक्टेयर में उत्खनन कर दिया है। जांच के बाद विभाग ने सातों खदानों के पट्टेदारों के विरुद्ध प्रकरण बनाया है। इस प्रकरण के अनुसार सभी पट्टेदारों पर कुल 30 करोड़ 34 लाख रुपए का अर्थदंड लगाया गया है। विभाग ने इस मामले में जिला न्यायालय में केस भी दर्ज कराया है, जिस पर सुनवाई और फैसला आना है।
200 मीटर तक पट चुकी थी नदी की चौड़ाई
इन फर्शी खदानों से निकलने वाले वेस्ट मटेरियल के कारण रायपुर और महासमुंद सीमा से गुजरी महानदी का असिस्त्व भी खतरे में आ गया था। सभी पट्टेदार बिना किसी की अनुमति लिए खदानों से निकलने वाले वेस्ट मटेरियल (पत्थरों) को महानदी के तटों पर डंप करा रहे थे, जो एनजीटी के नियमों का उल्लंघन है। इससे महानदी के किनारे 200 मीटर तक पट चुके हैं।
सीएम और पीएमओ तक शिकायत
इन फर्शी खदानों में चल रहे नियमों के विरुद्ध उत्खनन और महानदी को वेस्ट पत्थरों से पाटे जाने के विरोध में गांव के कई लोगों ने पूर्व में इसकी शिकायत जिला प्रशासन से लेकर मंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल से लेकर पीएमओ कार्यालय तक कर चुके हैं। इसके बाद भी महानदी को पाटने से रोकने के लिए जिला और राज्य पर्यावरण विभाग की ओर से अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।
हाईकोर्ट में पीआईएल लगा दो सप्ताह में मांगा जवाब
खदानों से निकलने वाला वेस्ट पत्थरों से महानदी का अस्तित्व खतरे में है। इसे लेकर हाईकोर्ट में निसदा गांव के कुछ लोगों ने जनहित याचिका भी लगी हुई है। कोर्ट ने इस मामले में खनिज विभाग, प्रशासन को भी पार्टी बनाते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। इस जन याचिका में पट्टेदार भी अपना पक्ष रख सकते हैं।
ठेका निरस्त कर दिया है
रायपुर खनिज विभाग ने जिला अधिकारी राजेश मालवे ने बताया कि, निसदा की सातों फर्शी खदानों का ठेका निरस्त कर दिया है। पट्टेदारों को जवाब प्रस्तुत करने नोटिस जारी किया था, जो जवाब आया है वह संतोषजनक नहीं है तथा नियमों के विरुद्ध खदानों में उत्खनन जाना पाया है। इस कारण प्रशासन ने छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम के तहत ठेका निरस्त कर दिया है।
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