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भोपाल और भी
भोपाल में चार स्थानों पर छठ पर्व का आयोजन: भोजपुरी, मैथिली छठ गीतों की सुरीली प्रस्तुतियों से झूमें लोग
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 7 नवम्बर 2024,  05:44 AM IST
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मप्र शासन, संस्कृति विभाग की भोजपुरी साहित्य अकादमी द्वारा लोक आस्था के महापर्व छठ पर्व का दो दिवसीय भव्य आयोजन का शुभारंभ गुरुवार की शाम को किया गया।

भोपाल:

मध्यप्रदेश के भोपाल में डूबते सूरज के पूजन के साथ जहां घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ रहा था, वहीं छठ मैया को धन्यता प्रकट करते भोजपुरी के लोकगीतों ने आत्मा को दिव्य आनन्द से भर दिया। छठ गीतों से सजा भोपाल के प्रेमपुरा, सैर सपाटा, बरखेड़ा, शीतलदास की बगिया के घाटों पर यह आयोजन किया गया। यह वही गीत थे जिन्हें प्रतिवर्ष छठ पर्व के दौरान गांव, गलियों, घाटों पर आस्था से भरपूर स्वरों में जन—जन गाते हैं। मप्र शासन, संस्कृति विभाग की भोजपुरी साहित्य अकादमी द्वारा लोक आस्था के महापर्व छठ पर्व का दो दिवसीय भव्य आयोजन का शुभारंभ गुरुवार की शाम को किया गया।

पिनहले महादेव पियरिया 

प्रेमपुरा घाट, सैर सपाटा घाट पर लोकगायक कल्पनाथ यादव एवं राजकुमार ठाकुर द्वारा प्रस्तुति की शुरूआत अरघ के बेरा भइल.... गीत से की। इसके बाद पिनहले महादेव पियरिया.... गोदिया में हुई हैं ललनवा.... प्रस्तुत किया। सुरीले गीतों से सजी इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए कुसुम पाण्डेय ने सुनिल अरजिया हमार छठी मैया.... गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को छठ के उस दिव्य संसार की सुरीली यात्रा कराई जो लाखों लोगों के आस्था का प्रतीक है।

विजया ने सुनाया कांचहिं बांस के बहंगिया....

शीतलदास की बगिया में आयोजित छठ पर्व में सुप्रसिद्ध गायिका विजया भारती ने अपनी गायकी की शुरुआत कांचहिं बांस के बहंगिया.... गीत से की। इसके बाद रिमिक झिमिक देव बरसे ले...., केरवा जे फरेला घवद से...., सुरुज आज जनि जल्दी जईह घरवा...., पटना के पक्की सड़किया...., छठी मैया कल जोरि किनार पर ठाढ छी.... जैसे गीतों से घाट किनारे छठ पर्व का दिव्य आनन्द भर दिया। **शारदा सिन्हा के गाए भोजपुरी—मैथिली छठ गीतों का किया गान**  वहीं बरखेड़ा में आयोजित छठ पर्व में सुप्रसिद्ध लोकगायिका चंदन तिवारी ने महान गायिका शारदा सिन्हा को श्रद्धांजलि दी एवं उनके गाये श्रेष्ठ भोजपुरी—मैथिली छठ गीतों का गायन किया। उन्होंने सकल जगतारिणी हे छठी माता...., आठ ही काठ के कोठरिया हो दीनानाथ...., सुनअ सटकुनिया हो दीनानाथ.... सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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