सुप्रीम कोर्ट ने फिल्मकार विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को जमानत दे दी है. विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी पर राजस्थान में इंदिरा आईवीएएफ़ के संस्थापक अजय मुर्डिया के लिए एक बायोपिक फिल्म बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगा था. पिछले साल दिसंबर में राजस्थान पुलिस ने उन्हें मुंबई से गिरफ्तार किया था और इसके बाद से उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया. श्वेतांबरी भट्ट को पिछले सप्ताह 13 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी थी. आज इस मामले में विक्रम भट्ट की अर्जी पर सुनवाई हुई जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पति-पत्नी को नियमित जमानत दे दी.
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी के अर्जी पर विचार के बाद उन्हें जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए.
जमानत पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि पक्षकार इस आपसी विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान तलाशना चाहते हैं. इसके बाद शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने न्यायालय से कहा कि समझौते की संभावनाएं तलाशने के उद्देश्य से आरोपियों को अंतरिम जमानत पर रिहा किए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. इसके बाद शिकायतकर्ता के उक्त बयान के पश्चात न्यायालय ने उन्हें नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश सुनाया.
हालांकि, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने जमानत का विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि जांच अभी लंबित है और चूंकि अधिकांश गवाह मुंबई में स्थित हैं इसलिए इससे वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं. लेकिन अदालत ने कहा कि चूंकि शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों ही विवाद के समाधान के इच्छुक हैं, इसलिए उन्हें समझौते की संभावनाएं तलाशने की अनुमति दी जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच के विवाद को मध्यस्थ के जरिए हल करने का निर्देश देते हुए उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष इसका सौहार्दपूर्ण समाधान का प्रयास करेंगे.
उदयपुर के मशहूर इंदिरा आईवीएफ के संस्थापक डॉ. अजय मुर्डिया ने विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट के खिलाफ 44 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था. उन्होंने दावा किया कि भट्ट दंपति ने डॉ. मुर्डिया को 4 फिल्में बनाने के लिए निवेश करने और इससे भारी मुनाफे का लालच दिया था. इसके बाद फिल्म बनाने के नाम पर करीब 30 करोड़ रुपये लिए गए, लेकिन फिल्म नहीं बनी. मुर्डिया ने अपने साथ 44.7 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी, जालसाजी और धन के दुरुपयोग जैसे अपराधों का आरोप लगाया है.
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