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अमेरिका ने हॉर्मुज को खुलवाने के लिए ईरान पर दागे 5,000 पाउंड के 'बंकर बस्टर' बम
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 18 मार्च 2026,  08:03 PM IST
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अमेरिका ने हॉर्मुज को खुलवाने के लिए ईरान पर दागे 5,000 पाउंड के 'बंकर बस्टर' बम

नई दिल्ली : मिडल ईस्ट में चल रही खींचतान अब आर-पार की जंग में बदल गई है। दुनिया भर में तेल की सप्लाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खुलवाने के लिए अमेरिका ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि उनकी वायुसेना ने ईरान के उन मजबूत मिसाइल अड्डों को निशाना बनाया है, जहाँ से अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले किए जा रहे थे। इस ऑपरेशन में अमेरिका ने अपने तरकश के सबसे घातक हथियार—5,000 पाउंड के 'बंकर बस्टर' बमों का इस्तेमाल किया है।

​क्यों हॉर्मुज बना 'डेथ जोन' और अमेरिका ने क्यों लिया ये बड़ा फैसला? 
​ईरान ने हॉर्मुज के उस समुद्री रास्ते को बंद कर दिया था, जहाँ से दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस नाकेबंदी की वजह से पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 'X' पर जानकारी दी कि ईरान के तट पर बने एंटी-शिप मिसाइल अड्डों को इन भारी-भरकम बमों से पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। अमेरिका का मकसद तेल की सप्लाई को बहाल करना और ईरानी मिसाइलों के खतरे को जड़ से खत्म करना है।

 

​क्या है ये 'बंकर बस्टर' बम और क्यों है इसकी इतनी चर्चा? 
'बंकर बस्टर' (GBU-28) कोई साधारण बम नहीं है। आम भाषा में समझें तो ये ऐसे बम हैं जो जमीन या कंक्रीट की कई मीटर मोटी दीवारों को भेदकर गहराई में छिपे दुश्मनों का काल बन जाते हैं।

  • वजन: 5,000 पाउंड यानी करीब 2200 किलो।
  • क्षमता: यह जमीन के अंदर गहराई में बने बंकरों को मिट्टी में मिलाने में सक्षम है।
  • कीमत: 2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसे बम की कीमत करीब 2.88 लाख डॉलर होती है।

ईरान के इन मजबूत मिसाइल ठिकानों को मिट्टी में मिलाने के लिए ये बम काफी साबित हुए, हालांकि अमेरिका के पास इससे भी बड़े 30,000 पाउंड वाले बम भी मौजूद हैं।

​ट्रंप की नाराजगी: "नाटो साथियों ने छोड़ दिया साथ" 
इस भीषण जंग के बीच एक दिलचस्प कूटनीतिक पहलू भी सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस लड़ाई में खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। उन्होंने नाटो (NATO) समेत अपने पुराने साथी देशों से मदद मांगी थी, लेकिन ज्यादातर देशों ने इस सीधे युद्ध में शामिल होने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ट्रंप इस बात से बेहद नाराज हैं कि अमेरिका ने सालों तक नाटो की मदद की, लेकिन वक्त आने पर उन्होंने साथ नहीं दिया। ट्रंप का मानना है कि ईरान से खतरा बढ़ रहा है, इसलिए ये कदम उठाना उनकी मजबूरी थी।

​ईरान का परमाणु कार्यक्रम और इजरायली कनेक्शन 
इस पूरी कहानी के पीछे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू महीनों से अमेरिका को ईरान के खिलाफ इस सैन्य रास्ते पर चलने के लिए उकसा रहे थे।

दूसरी तरफ, ईरान आज भी अपनी बात पर अड़ा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली बनाने जैसे शांतिपूर्ण कामों के लिए है और उसका बम बनाने का कोई इरादा नहीं है।


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