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मध्य प्रदेश और भी
न टायर्ड, न रिटायर्ड': राज्यसभा में दिग्विजय सिंह ने दोहराईं पूर्व PM वाजपेयी की पंक्तियां, कबीर के दोहों से किया समापन
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 18 मार्च 2026,  09:06 PM IST
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राज्यसभा में दिग्विजय सिंह का विदाई भाषण। अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया, कबीर के दोहों से खत्म किया भाषण। कहा - 'आगे चलकर हम काम करेंगे।'

मध्यप्रदेश। राज्यसभा में बुधवार को कांगेस की ओर से सांसद दिग्विजय सिंह ने विदाई भाषण दिया। अगले तीन महीने में 59 सांसद राजयसभा से रिटायर हो रहे हैं। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी इन्हीं में से एक हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि, 'छात्र जीवन में मेरा राजनीति से कोई लेना देना नहीं था। परिस्थितियां ऐसी बनी कि, मैं 22 साल की उम्र में नगर पालिका अध्यक्ष बना, 30 साल की उम्र में विधायक बन गया, 33 साल में सांसद बना और फिर 40 साल में मुख्यमंत्री बन गया। पर लाइफ में कभी विचारधारा से समझौता नहीं किया।' 

दिग्विजय सिंह ने अपने भाषण के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया। उन्होंने पूर्व पीएम की बात को दोहराते हुए कहा कि, 'मैं न टायर्ड हूं न रिटायर्ड। आगे चलकर हम काम करेंगे।'

मनभेद किसी से नहीं
सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि, 'राजनीतिक जीवन में मैंने कभी किसी के लिए कटुता नहीं पाली। कई बार मतभेद होते थे, लेकिन मनभेद किसी से नहीं हुआ। मैं जिनकी विचारधारा से सहमति नहीं होता, उनसे भी मेरे अच्छे रिश्ते हैं। मेरा सौभाग्य है कि मैं उस लोकसभा में भी रहा- जिसमें अटल जी, राजीव जी और चंद्रशेखर जी हुआ करते थे। इन लोगों से प्रभावित होकर ही मैंने अपना राजनीतिक सफर पूरा किया है।'

 

सांप्रदायिक कटुता बढ़ती जा रही
'लोकतंत्र की बुनियाद है- चर्चा और सदन में सत्ता पक्ष की यह जिम्मेदारी होती है कि विपक्ष के साथ चर्चा के बाद कोई रास्ता निकाले। रास्ता निकलता है और निकलना चाहिए। आज इस देश में जिस प्रकार से सांप्रदायिक कटुता बढ़ती जा रही है, यह लोकतंत्र, संविधान, समाज और इस देश के लिए अच्छा नहीं है।'

4 मिनट पचास सेकंड तक बोले दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने 4 मिनट पचास सेकंड तक विदाई भाषण दिया। सभी का आभार जताने के बाद उन्होंने अपने भाषण का अंत कबीर दास जी की पंक्तियों से किया। उन्होंने कहा - 'मैं राजनीतिक जीवन में उन पंक्तियों पर चलता हूं जैसा कबीरदास जी कह गए थे। कबीर खड़ा बजार में मांगे सबकी खैर, न काहू से दोस्ती न काहू से बैर।'

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