• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
रायपुर और भी
लाल आतंक के सूर्यास्त के साथ सुकमा में उदय हुआ स्वास्थ्य सेवाओं का सूरज
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 7 अप्रैल 2026,  08:15 PM IST
  • 274
लाल आतंक के सूर्यास्त के साथ सुकमा में उदय हुआ स्वास्थ्य सेवाओं का सूरज

*मेगा स्वास्थ्य शिविर में उमड़ा जनसैलाब*

*स्वास्थ्य शिविर में 6,500 से अधिक लोगों ने लाभ लिया* 

रायपुर / मेगा हेल्थ कैंप एक प्रमुख निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर है, जहाँ नामी सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर कैंसर, हृदय रोग, स्त्री रोग, और नेत्र रोग जैसी बीमारियों का मुफ्त इलाज, जांच और दवाइयां प्रदान करते हैं। इसमें आयुर्वेदिक चिकित्सा, दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंग वितरण और आधुनिक जांचकी सुविधाएं भी मिलती हैं। लाल आतंक की समाप्ति के इस दौर में जब क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल बना है, तब प्रशासन की पहुँच अंतिम छोर के व्यक्ति तक आसान हुई है। Image after paragraph

         जिला प्रशासन सुकमा और बेंगलुरु के एनटीआर फाउंडेशन के साझा प्रयासों से आयोजित दो दिवसीय सुपर स्पेशलिटी मेगा स्वास्थ्य शिविर का गत दिवस आयोजन किया गया। प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री एवं सुकमा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के द्वारा शुभारंभ पश्चात इस मेगा स्वास्थ्य शिविर में उन संवेदनशील और अंदरूनी क्षेत्रों के 3,700 से अधिक ग्रामीण बेखौफ होकर पहुँचे, जो कभी मुख्यधारा से कटे हुए थे। कमिश्नर बस्तर श्री डोमन सिंह के निर्देशानुसार कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित उक्त मेगा स्वास्थ्य शिविर में कुल 6,500 से अधिक लाभार्थियों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि अब ग्रामीण बंदूकों के साये से निकलकर आधुनिक चिकित्सा और विशेषज्ञ परामर्श पर भरोसा जता रहे हैं। शिविर के दौरान 21 विशेषज्ञ डॉक्टरों और 40 स्वास्थ्य योद्धाओं की टीम ने इन वनवासियों के लिए देवदूत बनकर काम किया।

            बस्तर के सुदूर अंचलों में कभी लाल आतंक की धमक से सहमे रहने वाले सुकमा जिले की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। दशकों पुराने संघर्ष और भय के बादलों को चीरकर अब यहाँ विकास और खुशहाली की नई किरणें बिखर रही हैं। जिला प्रशासन सुकमा और बेंगलुरु के एनटीआर फाउंडेशन के साझा प्रयासों से आयोजित दो दिवसीय सुपर स्पेशलिटी मेगा स्वास्थ्य शिविर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अब सुकमा नक्सलवाद की बेड़ियों को तोड़कर स्वस्थ और सशक्त होने की राह पर निकल पड़ा है। मिनी स्टेडियम में विगत 28 और 29 मार्च को आयोजित इस शिविर ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि जहाँ कभी गोलियों की गूँज थी, आज वहाँ सेवा और संकल्प के गीत गाए जा रहे हैं।

        शिविर में केवल सामान्य बीमारियों का ही नहीं, बल्कि कैंसर, हृदय रोग और न्यूरोलॉजी जैसी गंभीर समस्याओं का भी विशेषज्ञ उपचार किया गया। नक्सलवाद के दौर में स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहे बुजुर्गों के लिए 989 चश्मों का वितरण किया गया, जिससे उनकी धुंधली दुनिया एक बार फिर रोशनी से भर उठी। वहीं 1,500 बच्चों का व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण कर आने वाली पीढ़ी को कुपोषण और बीमारियों से मुक्त करने का संकल्प लिया गया। विशेष रूप से 85 महिलाओं की कैंसर स्क्रीनिंग और 2,300 आभा आईडी का निर्माण इस बात का प्रतीक है कि सुकमा अब डिजिटल स्वास्थ्य और सुरक्षा कवच से लैस हो रहा है।

       लाल आतंक के खात्मे के बाद सुकमा का यह बदलाव पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल है। यह शिविर केवल एक चिकित्सकीय आयोजन नहीं था, बल्कि शासन-प्रशासन के प्रति जनता के अटूट विश्वास का उत्सव था। 153 आयुष्मान कार्डों का मौके पर निर्माण यह सुनिश्चित करता है कि अब सुदूर अंचल का गरीब से गरीब व्यक्ति भी पैसे के अभाव में इलाज से वंचित नहीं रहेगा। सुकमा आज नक्सलवाद की पहचान को पीछे छोड़कर सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में एक रोल मॉडल बनकर उभर रहा है, जहाँ हर चेहरा मुस्कुरा रहा है और हर कदम एक खुशहाल भविष्य की ओर बढ़ रहा है।

RO. NO Ooo
❮ ❯

Add Comment


Add Comment

RO. NO Ooo
558171020260826391010662253.png





ताज़ा समाचार और भी
Get Newspresso, our morning newsletter