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रायपुर और भी
राज्य के सिंचाई जलाशयों में अभी 67 प्रतिशत से अधिक जल भराव
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 9 अप्रैल 2026,  06:33 PM IST
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राज्य के सिंचाई जलाशयों में अभी 67 प्रतिशत से अधिक जल भराव

पिछले दो सालों की तुलना में जल उपलब्धता की स्थिति काफी बेहतर

रायपुर/ छत्तीसगढ़ राज्य के 12 वृहद एवं 34 मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में इस वर्ष जल भराव की स्थिति काफी बेहतर है। वर्तमान में राज्य के कुल 46 प्रमुख सिंचाई जलाशयों में औसत रूप से 67.43 प्रतिशत जल भराव है, जो कि वर्ष 2025 मेें इसी अवधि में औसत रूप से 45.23 प्रतिशत तथा वर्ष 2024 के 42 प्रतिशत की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। यह स्थिति राज्य में बेहतर वर्षा, सुनियोजित जल प्रबंधन तथा जलाशयों के प्रभावी संचालन का परिणाम है।

राज्य के 12 वृहद सिंचाई परियोजनाओं में वर्तमान में 68.19 प्रतिशत जल भराव है, जबकि वर्ष 2025 में यह 45.84 प्रतिशत तथा वर्ष 2024 में 38.62 प्रतिशत था। प्रमुख वृहद जलाशयों में शामिल मनियारी जलाशय में 90.41 प्रतिशत, मुरूमसिल्ली में 86.85 प्रतिशत, खारंग में 84.99 प्रतिशत, दुधावा में 84.54 प्रतिशत, रविशंकर सागर में 76.72 प्रतिशत, सोंढूर में 70.65 प्रतिशत एवं तांदुला में 66.19 प्रतिशत में जल उपलब्ध है। वहीं मिनीमाता बांगो जलाशय में 63.86 प्रतिशत तथा केलो में अभी 51.83 प्रतिशत जल भराव है। कोडार जलाशय में अपेक्षाकृत कम 35.45 प्रतिशत जल उपलब्ध है। 

इसी प्रकार राज्य की 34 मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में वर्तमान में 63.38 प्रतिशत जल भराव है, जो कि वर्ष 2025 के 44.62 प्रतिशत एवं वर्ष 2024 के 45.38 प्रतिशत से अधिक है। मध्यम जलाशयों में छिरपानी जलाशय मेें 92.23 प्रतिशत, खपरी में 92.98 प्रतिशत, पिपरिया नाला में 89.69 प्रतिशत, गोंडली में 85.53 प्रतिशत, सुतियापाट में 79.82 प्रतिशत, सारोदा में 77.57 प्रतिशत एवं कोसारटेडा में 77.46 प्रतिशत जल भराव अपने उच्च स्तर पर हैं। 

प्रदेश में उपलब्ध जल का उपयोग किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं से नियंत्रित एवं चरणबद्ध रूप से जल छोड़ा जा रहा है। रविशंकर सागर (गंगरेल) परियोजना से नहरों के माध्यम से धमतरी एवं रायपुर क्षेत्रों में निस्तारी एवं सिंचाई जल उपलब्ध कराया जा रहा है। दुधावा जलाशय से मुख्य नहरों के जरिए पानी दिया जा रहा है। सोंढूर परियोजना से नहर प्रणाली के माध्यम से जल छोड़ा जा रहा है। कोडार जलाशय से लगभग 6.84 क्यूमेक्स (घन मीटर प्रति सेकण्ड) जल नहरों के माध्यम से छोड़ा जा रहा है। इसके अतिरिक्त परालकोट परियोजना से दाएं एवं बाएं तट नहरों के जरिए जल वितरण किया जा रहा है।

मध्यम परियोजनाओं में भी खरखरा, गोंडली, पिपरिया, सारोदा, जुमका, केदार नाला एवं अन्य जलाशयों से आवश्यकता अनुसार नहरों एवं स्लुइस गेट के माध्यम से जल छोड़ा जा रहा है, जिससे रबी फसलों की अंतिम सिंचाई एवं ग्रीष्मकालीन फसलों एवं निस्तारी के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराया जा सके। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जल का सदुपयोग तथा सभी सिंचित क्षेत्रों को आवश्यकतानुसार पानी मिल सके।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए जल संसाधनों का वैज्ञानिक एवं प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष जलाशयों में बेहतर जल भराव समन्वित प्रयासों का परिणाम है। हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश के किसानों को समय पर पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध हो, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि हो और किसानों की आय में सुधार हो। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जलाशयों के जल स्तर की सतत निगरानी करते हुए जल का उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

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