• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
रायपुर और भी
वन धन विकास केंद्र वनांचल की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया सोपान
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 14 मई 2026,  08:00 PM IST
  • 111
वन धन विकास केंद्र वनांचल की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया सोपान

लघु वनोपज प्रसंस्करण से हजारों महिलाओं को मिला सम्मानजनक रोजगार और आय का स्थायी जरिया

रायपुर/ छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में वन धन विकास केंद्र महिलाओं की आर्थिक आजादी और आत्मनिर्भरता का एक सशक्त आधार बनकर उभरे हैं। प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन और प्रधानमंत्री जनमन योजना के सफल क्रियान्वयन से राज्य में अब तक 155 वन धन विकास केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें 139 सामान्य क्षेत्रों में और 16 केंद्र विशेष रूप से पिछड़ी जनजातीय समूह (पीव्हीटीजी) क्षेत्रों में संचालित हैं।

*संग्रहण से प्रसंस्करण तक का सफर*

       इन केंद्रों ने पारंपरिक लघु वनोपज संग्रहण को आधुनिक प्रसंस्करण से जोड़कर एक नई दिशा दी है। यहाँ न केवल वनोपजों का संग्रहण होता है, बल्कि उनका प्राथमिक प्रसंस्करण और उच्च गुणवत्ता वाले हर्बल उत्पादों का निर्माण भी किया जा रहा है। इस पहल ने हजारों महिलाओं को उनके गांव के समीप ही स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया है।

*हजारों समूहों को मिला आर्थिक संबल*

          वन धन विकास केंद्रों की सफलता का अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है। लगभग 4 हजार 900 महिला स्व-सहायता समूह इन केंद्रों से सीधे जुड़े हैं। करीब 55 हजार महिला सदस्य गांवों और हाट-बाजारों में संग्रहण एवं प्रसंस्करण के कार्य में संलग्न हैं। पिछले पांच वर्षों में संग्रहण कार्य के लिए महिलाओं को लगभग 4 करोड़ रुपये का कमीशन वितरित किया गया है।

*हर्बल उत्पादों से बढ़ी आय*

         प्राथमिक संग्रहण के साथ-साथ मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लगभग 1,300 महिला समूहों की 17,000 महिलाएं हर्बल उत्पाद निर्माण से जुड़ी हैं। इस विशिष्ट कार्य के लिए अब तक करीब 1 करोड़ रुपये का कमीशन महिलाओं को दिया गया है। तैयार उत्पादों की आपूर्ति आयुष विभाग को की जा रही है। इसी कड़ी में 4 केंद्रों ने 25.17 लाख रुपये का शुद्ध लाभांश अर्जित कर एक मिसाल पेश की है।

*स्थानीय संसाधनों से सशक्तिकरण*

         वन धन विकास केंद्रों की यह मुहिम न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से वनांचल की अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान कर रही है। यह पहल लोकल फॉर वोकल और आत्मनिर्भर भारत के सपने को छत्तीसगढ़ के जंगलों में हकीकत में बदल रही है।


Add Comment


Add Comment

960030820260416021008965415.png





Get Newspresso, our morning newsletter