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नक्सल मुक्त क्षेत्रों में आधुनिक खेती से कृषक गोपाल एर्रागोला ने रची सफलता की नई इबारत
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 15 मई 2026,  09:25 PM IST
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नक्सल मुक्त क्षेत्रों में आधुनिक खेती से कृषक गोपाल एर्रागोला ने रची सफलता की नई इबारत

संघर्ष से समृद्धि

रायपुर/ नक्सल मुक्त क्षेत्रों (जैसे छत्तीसगढ़ के बस्तर, सुकमा, नारायणपुर) में अब पारंपरिक खेती की जगह आधुनिक और लाभकारी खेती (केला, सुगंधित पौधे) ले रही है, जिससे किसानों की आय दोगुनी हो रही है। कृषि विज्ञान केंद्रों की मदद से वैज्ञानिक तकनीक, ड्रिप सिंचाई और उन्नत बीजों का उपयोग कर किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं और कृषि अब एक सुरक्षित आजीविका बन रही हैImage after paragraph

             बीजापुर जिले के ग्राम फुतकेल निवासी कृषक गोपाल एर्रागोला ने कठिन भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के बीच आधुनिक एवं बहुफसली खेती अपनाकर जिले के किसानों के लिए एक नई मिसाल पेश की है। जो गोपाल कभी केवल वर्षा आधारित धान की खेती पर निर्भर थे, आज वे विविध फसलों और एकीकृत कृषि के जरिए लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।

*चुनौती से अवसर तक का सफर*

               नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण पहले खेती करना गोपाल के लिए कभी एक बड़ी चुनौती थी। कृषि विभाग के अधिकारियों ने जब उनके खेत का निरीक्षण किया, तो पाया कि तालपेरू नदी के किनारे स्थित होने के कारण उनकी भूमि व्यावसायिक फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। जिला प्रशासन की पहल पर नदी किनारे विद्युत विस्तार कराया गया, जिससे सिंचाई की बाधा दूर हुई।

*तकनीक और फसल चक्र से बढ़ी आय*

            सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद कृषि विभाग और आत्मा (।ज्ड।) योजना के मार्गदर्शन में गोपाल ने पारंपरिक खेती छोड़कर फसल चक्र अपनाया। उन्होंने धान के साथ-साथ रबी फसलों में मक्का, मूंगफली और मिर्च की खेती कर रहे हैं। एकीकृत कृषि के रूप में सब्जी उत्पादन, पशुपालन और मछली पालनकरते हैं। विशेष रूप से मिर्च के उत्पादन ने उनकी आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव लाया।

*शासन की योजनाओं का मिला संबल*

          गोपाल की सफलता में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं ने श्बैकबोनश् का काम किया। किसान क्रेडिट कार्ड (ज्ञब्ब्)रू बीज, उर्वरक और नगद सहायता, शाकम्भरी योजना से डीजल पंप और नेक स्प्रेयर पंप की प्राप्ति हुई। सौर सुजला योजना (क्रेडा) से सोलर प्लेट्स के माध्यम से निर्बाध ऊर्जा की आपूर्ति हो रही है। नियद नेल्ला नार योजना से धान बीज, उर्वरक और जुताई हेतु आर्थिक मदद, माइक्रो इरीगेशनके माध्यम से टपक (क्तपच) सिंचाई से जल प्रबंधन, किसान सम्मान निधि के रूप में प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता मिल रही है।

*प्राकृतिक खेती की ओर कदम*

             गोपाल का चयन राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के कलस्टर में भी हुआ है। उन्होंने एक एकड़ भूमि में जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक उत्पादों का प्रयोग कर लागत में कमी और मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि की है।

*आय का आंकड़ा और सामाजिक प्रभाव*

            खेती, पशुपालन और मछली पालन के समन्वित प्रयासों से गोपाल को वर्ष में 3 लाख 93 हजार 750 रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई है। आज उनकी सफलता को देखकर गांव के अन्य युवा और किसान भी वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित हो रहे हैं।

कृषक गोपाल एर्रागोला का कहना है कि अधिकारियों के सतत मार्गदर्शन और शासन की योजनाओं ने मेरी खेती और जीवन के प्रति नजरिया बदल दिया। आज मेरे परिवार न केवल आर्थिक रूप से सशक्त है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा भी बना है।

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