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जब सरकार ने सुनी मिट्टी की पुकार, गोड़बहाल के गेट से फिर बह निकली उम्मीद की जल
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 19 मई 2026,  06:20 PM IST
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जब सरकार ने सुनी मिट्टी की पुकार, गोड़बहाल के गेट से फिर बह निकली उम्मीद की जल

सुशासन तिहार—जहां शिकायतें फाइलों में नहीं, खेतों तक पहुंचकर होती हैं समाधान *

रायपुर, / महासमुंद के पिथौरा विकासखंड के परसापाली गांव में शाम होते ही खेतों के किनारे बुजुर्ग किसान रामलाल यादव अक्सर गोड़बहाल जलाशय की तरफ टकटकी लगाकर देखते रहते थे। 

सालों से यही जलाशय पोटापारा और परसापाली के खेतों की प्यास बुझाता आया था। पर इस बार बरसात से पहले ही उसका मुख्य गेट जर्जर होकर जवाब दे गया। गेट से पानी रिसता रहता, खेतों तक पानी पहुंचता ही नहीं। बीज पड़े रहे, मगर सिंचाई न होने से फसल का सपना अधूरा रह जाता।

“साहब, बीज बो दिए, पर पानी नहीं पहुंचा तो सब मेहनत मिट्टी में मिल जाएगी,”— यही दर्द लेकर रामलाल और गांव के दर्जनों किसान सुशासन तिहार के समाधान शिविर में पहुंचे। मंच पर उनकी बात सुनी गई, कागजों में दर्ज हुई, और सबसे बड़ी बात—भूली नहीं गई।

शिकायत सुनते ही कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने उसी वक्त जल संसाधन विभाग को निर्देश भेजे। अगली सुबह कार्यपालन अभियंता अजय खरे अपनी टीम के साथ गोड़बहाल पहुंचे। टूटे गेट को देखा, औजार मंगवाए और प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत शुरू कर दी।

तीन दिन बाद जब गेट फिर से मजबूत होकर खड़ा हुआ, तो गांव में जैसे त्योहार जैसा माहौल हो गया। पानी का पहला प्रवाह जब नहरों में उतरा, तो खेतों की सूखी मिट्टी ने जैसे राहत की सांस ली। रामलाल की आंखें भर आईं। 

“सालों से यही शिकायत करते आए, पर इस बार मुख्य मंत्री श्री विष्णुदेव की सरकार सरकार ने सच में सुनी। सुशासन तिहार ने हमारी आवाज को सीधे अफसरों तक पहुंचा दिया। अब गोड़बहाल से निकलने वाला पानी सिर्फ खेतों को नहीं सींच रहा, वो किसानों के भरोसे को भी सींच रहा है। 

राज्य सरकार के लिए ये सिर्फ एक गेट की मरम्मत नहीं है। ये इस बात का सबूत है कि जब शासन ग्रामीणों की मांग को प्राथमिकता देता है, तो फसलों के साथ-साथ उम्मीदें भी फिर से लहलहा उठती हैं।

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