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समूह से मिले सहयोग से स्वरोजगार से मिली आत्मनिभर्रता-उमा
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 27 मई 2026,  05:50 PM IST
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समूह से मिले सहयोग से स्वरोजगार से मिली आत्मनिभर्रता-उमा खेती, मछली पालन और लघु व्यवसाय कर बनीं लखपति दीदी

रायपुर, / मछली पालन और छोटे व्यवसायों ने ग्रामीण भारत, विशेषकर छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों की महिलाओं को स्वरोजगार और शानदार सफलता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। इस क्षेत्र में सही जानकारी, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं के जरिए महिलाएं और युवा आर्थिक रूप से मजबूत होकर दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं।Image after paragraph

           कलेक्टर बलरामपुर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देशन एवं जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर के मार्गदर्शन में जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें सशक्त बनाया जा रहा है।

 *ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी उमा सिंह*

          जनपद पंचायत बलरामपुर के ग्राम महाराजगंज की निवासी एवं गुलाब महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य उमा सिंह आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं। समूह से जुड़ने के बाद उमा ने चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश कोष तथा बैंक लिंकेज के माध्यम से कुल 85 हजार रुपये का ऋण लिया। इस राशि का उपयोग उन्होंने खेती, मत्स्य पालन और छोटे व्यवसाय को विकसित करने में किया।

*लखपति दीदी के रूप में पहचान* 

          उमा ने 2.5 एकड़ भूमि में धान एवं 1.5 एकड़ में मक्का की खेती की। साथ ही अपनी डबरी में मछली बीज डालकर मत्स्य पालन शुरू किया। कृषि कार्यों के अलावा वे प्रतिदिन शाम को महाराजगंज चौक में चना-चाट की दुकान भी संचालित करती हैं, जिससे उन्हें नियमित अतिरिक्त आय प्राप्त होती है और इस वर्ष उन्होंने धान बिक्री से 1 लाख 42 हजार रुपये, मक्का से 16 हजार रुपये तथा मत्स्य पालन से 20 हजार रुपये की आय अर्जित की। विविध आजीविका गतिविधियों के जरिए वे अब गांव में लखपति दीदी के रूप में पहचान बना रही हैं।

          उमा सिंह की सफलता से प्रेरित होकर आसपास के गांवों की अन्य महिलाएं भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर उन्नत खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं सूक्ष्म व्यवसाय अपनाने के लिए आगे आ रही हैं। इस पहल से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ गांवों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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