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मुस्कान की नाव बनी आत्मनिर्भरता की पतवार
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 2 जून 2026,  08:37 PM IST
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मुस्कान की नाव बनी आत्मनिर्भरता की पतवार

पिलखा डैम की लहरों पर महिलाओं ने लिखी सफलता की नई इबारत

रायपुर / कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल बन रही हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई है। सूरजपुर जिले के पहाड़गांव स्थित पिलखा डैम की शांत जलराशि पर दौड़ती नावें अब केवल पर्यटकों को सैर नहीं करातीं, बल्कि महिलाओं के संघर्ष, साहस और सफलता की कहानी भी सुनाती हैं।Image after paragraph

यह कहानी है मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हौसलों को पतवार बनाकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की। समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सिंह और सचिव श्रीमती यशोदा दास के नेतृत्व में 10 महिलाओं ने पर्यटन क्षेत्र में कदम रखा और बोटिंग गतिविधि शुरू कर अपनी पहचान बना ली।

शुरुआत आसान नहीं थी। संसाधनों की कमी, तकनीकी जानकारी का अभाव और संचालन से जुड़ी अनेक चुनौतियां सामने थीं। लेकिन इन महिलाओं ने हार मानने के बजाय चुनौतियों को अवसर में बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने बोटिंग संचालन, सुरक्षा प्रबंधन और पर्यटकों की सुविधाओं की जिम्मेदारी स्वयं संभाली और धीरे-धीरे अपने प्रयासों को सफलता में बदल दिया।

आज पिलखा डैम आने वाले पर्यटक उत्साह के साथ बोटिंग का आनंद लेते हैं। इस पहल से समूह ने अब तक 74 हजार रुपये की आय अर्जित की है। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

समूह की सदस्य बताती हैं कि पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे पर्यटन गतिविधियों का संचालन करेंगी और स्वयं रोजगार सृजित करेंगी। आज वे अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की यह सफलता दर्शाती है कि अवसर और विश्वास मिलने पर ग्रामीण महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। पिलखा डैम की लहरों पर चल रही यह नाव अब केवल पर्यटन का साधन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त पहचान बन चुकी है।

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