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मैनपाट के ग्रामीणों की मौत मामले में नहीं पाए गए पीलिया एवं हेपेटाइटिस के लक्षण
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 6 जून 2026,  10:24 PM IST
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मैनपाट के ग्रामीणों की मौत मामले में नहीं पाए गए पीलिया एवं हेपेटाइटिस के लक्षण

स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आए अलग-अलग कारण

संयुक्त दल ने किया प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण, किसी भी गांव में सामूहिक संक्रमण के प्रमाण नहीं मिले

रायपुर/ विकासखंड मैनपाट में पीलिया से पांच लोगों की मृत्यु होने संबंधी जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की संयुक्त टीम द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत निरीक्षण एवं जांच की गई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि सभी मृतकों की मृत्यु के कारण अलग-अलग थे तथा इन्हें सामूहिक रूप से पीलिया या जलजनित संक्रमण से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं है।

संयुक्त दल द्वारा मृतकों के परिजनों से चर्चा, वर्बल ऑटोप्सी, संभावित मरीजों की स्वास्थ्य जांच तथा पेयजल स्रोतों का परीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि ग्राम कुनिया निवासी जितेन्द्र यादव की मृत्यु अस्पताल की रिपोर्ट एवं वर्बल ऑटोप्सी के अनुसार सेप्टिक शॉक (एमओडीएस) के कारण हुई थी। वहीं ग्राम बरिमा निवासी श्रीमती भगवती यादव में हेपेटाइटिस-ए की पुष्टि हुई थी, जबकि रायपुर स्थित चिकित्सकीय संस्थानों की रिपोर्ट में उनकी मृत्यु का कारण यकृत संबंधी जटिलताएं एवं कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट बताया गया है।

इसी प्रकार ग्राम बरिमा के विकास यादव की मृत्यु के संबंध में प्राप्त चिकित्सकीय रिपोर्टों में अलग-अलग चिकित्सकीय कारणों का उल्लेख है। वहीं ग्राम नर्मदापुर निवासी विकास यादव को हेपेटाइटिस नहीं था तथा वे बचपन से सिकल सेल रोग से पीड़ित थे। रायपुर में उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हुई। ग्राम केसरा निवासी आकांक्षा यादव भी हेपेटाइटिस से प्रभावित नहीं थीं। वे लंबे समय से टीबी एवं श्वसन संबंधी बीमारी से पीड़ित थीं तथा उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हुई।

जांच दल ने बताया कि सभी मृतक अलग-अलग गांवों एवं पारों के निवासी थे, जिनके बीच लगभग 15 से 20 किलोमीटर की दूरी है। स्वास्थ्य अमले द्वारा मृतकों के परिवारों एवं आसपास के क्षेत्रों का सर्वेक्षण करने पर किसी अन्य सदस्य में पीलिया अथवा हेपेटाइटिस के लक्षण नहीं पाए गए। इससे जल स्रोतों के माध्यम से किसी सामूहिक संक्रमण की पुष्टि नहीं होती है।

एहतियात के तौर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में डोर-टू-डोर स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया जा रहा है। साथ ही आवश्यक दवाइयों का वितरण एवं पेयजल स्रोतों के क्लोरीनेशन का कार्य भी निरंतर किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखाई देने पर तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें तथा अफवाहों पर ध्यान न दें।


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