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कृषि पंपों में कैपेसिटर: बेहतर वोल्टेज, बेहतर फसल
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 15 जून 2026,  09:20 PM IST
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कृषि पंपों में कैपेसिटर: बेहतर वोल्टेज, बेहतर फसल

दुर्ग। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) दुर्ग क्षेत्र ने समस्त किसानों से अपने कृषि पंपों में उचित क्षमता का कैपेसिटर अनिवार्य रूप से लगाने की अपील की है। दुर्ग रीजन के अंतर्गत दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिलों में लगभग 01 लाख 50 हजार से अधिक कृषि पंप संचालित हैं। विद्युत अभियांत्रिकी के नियमानुसार, इंडक्शन मोटरें कार्य करने के लिए विद्युत लाइन से वास्तविक पावर के साथ-साथ रिएक्टिव पावर भी लेती हैं, जिससे मोटर का पावर फैक्टर कम हो जाता है। इस वजह से मोटरें आवश्यकता से अधिक करंट (एम्पीयर) लेती हैं, जिससे न केवल बिजली का अनावश्यक नुकसान होता है, बल्कि वोल्टेज ड्रॉप और ट्रांसफार्मर के बार-बार खराब होने जैसी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं।
  खरीफ सीजन में जब लाखों की संख्या में पंप एक साथ चलते हैं, तो सिस्टम पर रिएक्टिव लोड का दबाव बढ़ जाता है, जो कुल लोड का लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक हो सकता है। यह ओवरलोडिंग वितरण ट्रांसफार्मरों और विद्युत लाइनों को प्रभावित करती है, जिसके परिणामस्वरूप खेतों में न केवल पानी की आपूर्ति कम हो जाती है बल्कि पंप जलने का खतरा भी बढ़ जाता है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि केवल नए उपकेंद्रों या लाइनों के विस्तार से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है, क्योंकि इसमें समय और भारी बजट लगता है। इसका सबसे प्रभावी और त्वरित तकनीकी समाधान मोटर के टर्मिनल पर कैपेसिटर लगाना ही है।
  छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के दिशा-निर्देशों (छ.ग. राज्य विद्युत प्रदाय संहिता 2011) के अनुसार, किसानों को अपनी मोटर की क्षमता के अनुरूप कैपेसिटर स्थापित करना अनिवार्य है। इसके तहत 03 अश्वशक्ति(एचपी) तक की मोटर के लिए 01 केवीएआर, 03 से 05 एचपी के लिए 02 केवीएआर, 05 से 7.5 एचपी के लिए 03 केवीएआर, 7.5 से 10 एचपी के लिए 04 केवीएआर और 10 से 15 एचपी की मोटर के लिए 05 केवीएआर क्षमता का कैपेसिटर लगाना आवश्यक है।
  सीएसपीडीसीएल दुर्ग क्षेत्र के कार्यपालक निदेशक संजय खंडेलवाल ने कहा कि कैपेसिटर का उपयोग न केवल वोल्टेज की समस्या को दूर करेगा, बल्कि यह पंप की कार्यक्षमता को बढ़ाकर उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखेगा एवं विद्युत उपकेंद्रों में भार को कम करेगा। कैपेसिटर की लागत, खराब पंप को बार-बार बनवाने या जलने के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान की तुलना में अत्यंत कम है। उन्होंने दुर्ग क्षेत्र के सभी कृषकों से अपील करते हुए कहा कि कृषक इस प्रमाणित तकनीकी उपाय को अपनाकर विद्युत प्रणाली को सुदृढ़ बनाने और अपनी सिंचाई व्यवस्था को बेहतर करने में सहयोग करें।


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