• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
कोरबा और भी
महंगाई पर एक और करंट – राहत के दावों के बीच बढ़ा बिजली का बोझ, हर घर की जेब पर असर, सियासत गर्म
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 16 जून 2026,  04:02 PM IST
  • 361
महंगाई पर एक और करंट – राहत के दावों के बीच बढ़ा बिजली का बोझ, हर घर की जेब पर असर, सियासत गर्म

महंगाई से जूझ रहे छत्तीसगढ़ के लाखों उपभोक्ताओं को अब बिजली के मोर्चे पर भी अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में औसतन 6.23 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा कर दी है। नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी। सरकार और आयोग भले ही इसे “मामूली वृद्धि” बता रहे हों, लेकिन विपक्ष और उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि बढ़ती महंगाई के बीच यह फैसला आम लोगों की जेब पर एक और चोट है।

नई दरों के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली शुल्क में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है। यानी जो परिवार पहले से महंगे राशन, स्कूल फीस, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की मार झेल रहे हैं, उन्हें अब हर महीने बढ़ा हुआ बिजली बिल भी चुकाना होगा। हालांकि आयोग का दावा है कि मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के कारण अधिकांश उपभोक्ताओं पर वास्तविक असर 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के बराबर होगा, लेकिन सवाल यह है कि जब हर जरूरी सेवा की कीमत बढ़ रही है तो छोटी बढ़ोतरी भी आम परिवार के बजट पर बड़ा असर डालती है।

मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

विशेषज्ञों का मानना है कि 200 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले मध्यम वर्गीय परिवारों पर इसका सीधा असर दिखाई देगा। गर्मी के मौसम में कूलर, पंखे, फ्रिज और अन्य उपकरणों के बढ़ते उपयोग के कारण अधिकांश शहरी परिवार 200 यूनिट की सीमा पार कर जाते हैं। ऐसे में बढ़ी हुई दरों का असर मासिक बजट में साफ दिखाई देगा।

किसानों और उद्योगों को भी राहत नहीं

आयोग ने कृषि पंपों के लिए भी 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की है। हालांकि सरकार सब्सिडी का हवाला देकर किसानों पर प्रभाव नहीं पड़ने की बात कह रही है, लेकिन विपक्ष का तर्क है कि सब्सिडी का बोझ आखिरकार सरकारी खजाने पर पड़ेगा और उसकी भरपाई कहीं न कहीं जनता से ही की जाएगी। उद्योगों के लिए भी बिजली दरें बढ़ाई गई हैं। उद्योग जगत का मानना है कि उत्पादन लागत बढ़ने का असर अंततः बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई देगा, जिसका बोझ उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ेगा।

विपक्ष को मिला नया मुद्दा

बिजली दरों में बढ़ोतरी ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का नया अवसर दे दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार एक तरफ महंगाई कम करने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर बिजली जैसी बुनियादी जरूरत को महंगा कर रही है। विपक्ष का आरोप है कि पिछले डेढ़ साल में जनता पर टैक्स, शुल्क और विभिन्न सेवाओं की कीमतों के रूप में लगातार आर्थिक बोझ बढ़ा है। ऐसे में बिजली दरों में वृद्धि आम उपभोक्ताओं की परेशानियां और बढ़ाएगी।

सवाल – सरप्लस राज्य फिर भी महंगी बिजली

सरकार का तर्क है कि कोयला, उत्पादन और वितरण लागत बढ़ने के कारण टैरिफ बढ़ाना जरूरी था। लेकिन उपभोक्ताओं का सवाल है कि जब राज्य बिजली उत्पादन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, तब भी उपभोक्ताओं को महंगी बिजली क्यों खरीदनी पड़ रही है?


Add Comment


Add Comment






ताज़ा समाचार और भी
Get Newspresso, our morning newsletter