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आसमान में उड़ता ड्रोन और सुधरती तकदीर
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 21 जून 2026,  05:13 PM IST
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आसमान में उड़ता ड्रोन और सुधरती तकदीर

सारंगढ़ की सुनीता पटेल ऐसे बनीं 'लखपति ड्रोन दीदी'

रायपुर, /कहते हैं कि अगर हौसलों को सही तकनीक और अवसरों के पंख मिल जाएं, तो ग्रामीण परिवेश की साधारण सी दिखने वाली महिलाएं भी कामयाबी की नई उड़ान भर सकती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के एक छोटे से गांव खोरीगांव की रहने वाली सुनीता पटेल की। सुनीता आज सिर्फ अपने घर की दहलीज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आसमान में ड्रोन उड़ाकर अपने खेतों को समृद्ध बना रही हैं और खुद 'लखपति दीदी' बनकर ग्रामीण सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

*शुरुआत एक सपने की, जिसने बदली जिंदगी*

    इस बदलाव की नींव तब पड़ी जब 15 अगस्त 2023 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने "नमो ड्रोन दीदी" योजना की घोषणा की थी। इस योजना का मकसद देश की ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़कर उनकी सालाना आय को 1 लाख रुपये से ऊपर ले जाना था। सुनीता पटेल ने इस सुनहरे मौके को हाथ से जाने नहीं दिया।

      दिसंबर 2023 में वे अपने सपनों की पोटली बांधकर 15 दिनों के कड़े प्रशिक्षण के लिए ग्वालियर गईं। वहां उन्होंने न सिर्फ ड्रोन उड़ाने की बारीकियां सीखीं, बल्कि खेतों में कीटनाशकों और नैनो उर्वरकों के सही इस्तेमाल का तकनीकी ज्ञान भी हासिल किया। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद जब उन्हें उर्वरक कंपनी 'इफको' (IFFCO) की ओर से कृषि ड्रोन मिला, तो मानो उनकी आजीविका को नए पंख मिल गए।

*खेतों में तकनीक की क्रांति और 2 लाख रुपए तक की आय*

     साल 2024 से शुरू हुआ सुनीता का यह सफर आज 2026 में सफलता के शिखर पर है। सुनीता अब हर साल खेतों में दवा और खाद का छिड़काव करके 1 से 2 लाख रुपये की सम्मानजनक वार्षिक आय कमा रही हैं। सबसे खूबसूरत बात यह है कि सुनीता अपने काम को सिर्फ एक व्यवसाय नहीं मानतीं। ग्रामीण परिवेश से जुड़ी होने के कारण वे अमीर-गरीब का भेद किए बिना, पैसों की परवाह किए बगैर हर किसान के खेत में उतनी ही शिद्दत से काम करती हैं।

       शनिवार को सारंगढ़ मंडी प्रांगण में जब 'खेती बचाओं अभियान' और 'प्राकृतिक खेती कार्यशाला' का आयोजन हुआ, तो सुनीता के हुनर को देखने भारी भीड़ उमड़ी। वहां मौजूद प्रदेश के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा के सामने जब सुनीता ने पानी से भरे भारी-भरकम ड्रोन को रिमोट के जरिए आसमान में उड़ाया और मैदान में छिड़काव का सजीव प्रदर्शन किया, तो पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा। मंत्री जी ने भी उनके इस जज्बे और तकनीकी कुशलता की जमकर सराहना की।

*कैसे काम करती है यह योजना और आप कैसे उठा सकते हैं लाभ?*

     सुनीता की यह सफलता दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) की ताकत को दर्शाती है। इस योजना के तहत देश की सात प्रमुख उर्वरक कंपनियां महिलाओं को ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई में मदद कर रही हैं।

    अगर गांव की कोई भी अन्य महिला सुनीता की तरह 'ड्रोन दीदी' बनना चाहती है, तो उसकी प्रक्रिया बेहद सरल है। इसके लिए महिला की उम्र 18 वर्ष से अधिक हो, वह कम से कम 10वीं पास हो और किसी पंजीकृत स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य हो। चयन होने के बाद नजदीकी रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (RPTO) में 15 दिनों की मुफ्त पायलट और असिस्टेंट ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके बाद DGCA द्वारा आधिकारिक 'रिमोट पायलट सर्टिफिकेट' मिलता है। ड्रोन खरीदने के लिए सरकार की तरफ से 80 प्रतिशत या अधिकतम 8 लाख रुपये तक की भारी सब्सिडी दी जाती है। बाकी बची रकम पर भी एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के जरिए महज 3 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर लोन मिल जाता है।

*प्रेरणा की नई मिसाल*

     आज सुनीता पटेल सिर्फ अपने गांव की नहीं, बल्कि पूरे जिले और पड़ोसी राज्यों की महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुकी हैं। शासकीय कार्यक्रमों में जब वे अपने ड्रोन के साथ पहुंचती हैं, तो उन्हें देखकर सैकड़ों अन्य ग्रामीण महिलाओं की आंखों में भी आत्मनिर्भर बनने के सपने तैरने लगते हैं। सुनीता ने साबित कर दिया है कि भारत के गांवों की तरक्की का रास्ता अब खेतों से होते हुए आसमान की तरफ जाता है। यदि योजना के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो इसकी आधिकारिक वेबसाइट https://namodronedidi.da.gov.in/ पर जाकर जानकारी ले सकते हैं।


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