गुजरात के वडोदरा में 978 स्क्वायर मीटर का एक प्लॉट चर्चा में है। दरअसल भारत के पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद यूसुफ पठान से यह जुड़ा है और लंबे समय से विवाद का केंद्र रहा है। प्लॉट अब नीलाम होने वाला है। वडोदरा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (VMC) ने इसकी सावर्जनिक नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह प्लॉट उन सात म्युनिसिपल ज़मीन के टुकड़ों में से एक है, जिनकी वैल्यूएशन को इस हफ़्ते सिविक बॉडी की स्टैंडिंग कमिटी ने मंज़ूरी दे दी है और उम्मीद है कि इसे जुलाई में VMC जनरल बोर्ड के सामने रखा जाएगा।
यह कदम तब उठाया गया है जब यूसुफ पठान को गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की एक पॉलिसी के तहत राहत मांगने के लिए समय दिया है, जो इंटरनेशनल खिलाड़ियों को ज़मीन देने का प्रावधान करती है। विवादित प्लॉट की पहचान शहर के तंदलजा इलाके में टाउन प्लानिंग स्कीम 22 में प्लॉट नंबर 90 के तौर पर हुई है। इसकी कीमत अब 2.10 लाख रुपये प्रति स्क्वेयर मीटर तय की गई है। मंज़ूर रेट पर जमीन की कीमत लगभग 20.5 करोड़ रुपये है। यह वैल्यूएशन उस रेट से लगभग तीन गुना है जिस पर 14 साल पहले यूसुफ पठान को प्लॉट अलॉट करने का प्रपोज़ल था।
यह विवाद 2012 का है जब यूसुफ पठान ने VMC से 99 साल की लीज़ पर ज़मीन अलॉट करने का आग्रह किया था। VMC की स्टैंडिंग कमिटी और जनरल बोर्ड ने प्रपोजल को मंज़ूरी दे दी और बिना पब्लिक ऑक्शन के प्लॉट को 57,270 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर पर अलॉट करने पर राज़ी हो गए।
हालांकि जब प्रपोज़ल को मंज़ूरी के लिए राज्य के अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के पास भेजा गया तो उसमें मुश्किलें आ गईं। जून 2014 में विभाग ने यह कहते हुए अलॉटमेंट को रिजेक्ट कर दिया कि पब्लिक बिडिंग प्रोसेस को फॉलो किए बिना ज़मीन ट्रांसफर नहीं की जा सकती। इसके कारण प्रपोज़ल को रोक दिया, लेकिन ज़मीन फेंसिंग से घिरी रही और यूसुफ पठान के कब्ज़े में रही।
यह मुद्दा जून 2024 में फिर से सामने आया, जब यूसुफ पठान पश्चिम बंगाल के बहरामपुर चुनाव क्षेत्र से TMC टिकट पर लोकसभा के लिए चुने गए थे। बीजेपी के कंट्रोल वाली सिविक बॉडी ने उन्हें म्युनिसिपल ज़मीन पर बिना इजाज़त कब्ज़े का आरोप लगाते हुए एक एनक्रोचमेंट नोटिस जारी किया। यूसुफ पठान ने VMC के एक्शन को चैलेंज किया और प्लॉट पर अपने दावे को मान्यता देने की मांग की। हालांकि अगस्त 2025 में हाई कोर्ट ने ओरिजिनल अलॉटमेंट प्रपोज़ल को खारिज करने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा और कहा कि अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट ने ट्रांज़ैक्शन को मंज़ूरी देने से इनकार करके अपनी शक्तियों के अंदर काम किया था।
इस साल 15 जून को हाई कोर्ट के ऑर्डर के खिलाफ यूसुफ पठान की अपील पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल की हेडिंग वाली एक डिवीजन बेंच ने उन्हें 1999 की राज्य पॉलिसी के तहत राहत पाने के लिए चार हफ्ते का समय दिया, जो कुछ शर्तों के तहत इंटरनेशनल खिलाड़ियों को ज़मीन अलॉट करने की इजाजत देती है। साथ ही बेंच ने सवाल किया कि अलॉटमेंट प्रपोजल खारिज होने और सिविक बॉडी को कोई पेमेंट किए बिना भी उन्होंने 2014 से ज़मीन पर कब्ज़ा कैसे जारी रखा।
कोर्ट ने यह भी बताया कि पब्लिक जमीन पर बिना इजाजत कब्ज़े के लिए मुआवजा, अगर देना बनता है, तो मौजूदा मार्केट रेट पर कैलकुलेट किया जा सकता है। इस बैकग्राउंड में VMC का ज़मीन का ताजा वैल्यूएशन न केवल भविष्य की किसी नीलामी के लिए बल्कि लंबे समय तक कब्ज़े से होने वाली संभावित रिकवरी तय करने के लिए भी अहम हो सकता है।
हालांकि नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यूसुफ पठान द्वारा बताई गई स्पोर्ट्सपर्सन पॉलिसी इस मामले में लागू नहीं हो सकती है, क्योंकि ज़मीन राज्य सरकार की नहीं, बल्कि नगर निगम की है। VMC के एक अधिकारी ने कहा, “यह पॉलिसी सिविक बॉडी के प्लॉट पर लागू नहीं होती है। राज्य जमीन दे सकता है, लेकिन ऐसा अलॉटमेंट म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन पर नहीं थोपा जा सकता।” उन्होंने आगे कहा कि एक बार जब जनरल बोर्ड वैल्यूएशन को मंज़ूरी दे देता है, तो लैंड और एस्टेट डिपार्टमेंट के तय करने पर प्लॉट को पब्लिक बिडिंग प्रोसेस के ज़रिए नीलाम किया जा सकता है।
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