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महासमुंद के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में हीरों की प्राप्ति से छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगा नया आयाम
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 23 जून 2026,  05:39 PM IST
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महासमुंद के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में हीरों की प्राप्ति से छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगा नया आयाम

प्रदेश में हीरा उद्योग, निवेश और रोजगार की संभावनाएं हुईं मजबूत

वैज्ञानिक अन्वेषण की सफलता से खनिज क्षेत्र में खुलेंगे नए अवसर, राज्य को मिलेगा राजस्व एवं आर्थिक विकास का नया स्रोत

खनिज संपदा की नई उपलब्धि से छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगा नया आयाम : मुख्यमंत्री

रायपुर,/ छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान हीरों की प्राप्ति ने प्रदेश को खनिज संपदा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा 200 टन बल्क सैंपल के परीक्षण एवं प्रसंस्करण के बाद कुल 5 हीरे प्राप्त हुए हैं, जिनका कुल वजन 1.22 कैरेट है। यह उपलब्धि क्षेत्र में हीरा खनिजीकरण की संभावनाओं की पुष्टि करती है तथा भविष्य में बड़े पैमाने पर निवेश, राजस्व सृजन और रोजगार के नए अवसरों का आधार बन सकती है।

एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा राज्य शासन को उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण, स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय अध्ययन तथा अन्वेषण ड्रिलिंग के आधार पर चिन्हित क्षेत्र से लगभग 200 टन खनिज सामग्री का बल्क सैंपल एकत्रित कर परीक्षण किया गया। प्रसंस्करण के पश्चात प्राप्त पांच हीरों में दो जेम क्वालिटी तथा तीन अन्य श्रेणी के हीरे शामिल हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत उत्साहजनक बताते हुए कहा कि प्रदेश की आर्थिक क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक दोहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी प्रबंधन और मूल्य संवर्धन आधारित औद्योगिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पहले से ही देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है और लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट तथा चूना पत्थर के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अब हीरा संभावनाओं की पुष्टि से प्रदेश की खनिज विविधता और अधिक समृद्ध होगी तथा खनिज अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नीति केवल खनिजों के उत्खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज आधारित उद्योगों, मूल्य संवर्धन इकाइयों और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। प्रदेश में खनिज संसाधनों के माध्यम से निवेश, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित कर विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए राज्य सरकार खनिज, कृषि, उद्योग, अधोसंरचना और मानव संसाधन विकास के सभी क्षेत्रों में समान रूप से कार्य कर रही है। बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र से प्राप्त यह सफलता प्रदेश की खनिज क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगी तथा निवेश, रोजगार और समावेशी विकास के नए द्वार खोलेगी।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक अन्वेषण और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रदेश के अन्य संभावित क्षेत्रों में भी खनिज संपदा की खोज को गति मिलेगी, जिससे छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक चरण में प्राप्त यह सफलता भविष्य के विस्तृत अन्वेषण कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत है। इससे क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना, संसाधन क्षमता और संभावित भंडारों के संबंध में व्यापक अध्ययन का मार्ग प्रशस्त होगा। आगामी सर्वेक्षणों एवं परीक्षणों से क्षेत्र की वास्तविक क्षमता का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा।

उल्लेखनीय है कि बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में किए गए बल्क सैंपल परीक्षण के परिणामस्वरूप प्राप्त हीरों को सुरक्षित अभिरक्षा में एनएमडीसी के पन्ना स्थित स्ट्रांग रूम में रखा गया है तथा आगे की कार्यवाही नियमानुसार और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप की जाएगी।


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