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दुर्ग निगम की सियासत में केरल टूर बना चर्चा का विषय, कांग्रेस में टूट की आशंका पर बढ़ी राजनीतिक हलचल
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 25 जून 2026,  08:43 PM IST
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सबसे अधिक चर्चा कांग्रेस खेमे को लेकर हो रही है। नगर निगम चुनाव के दौरान और उसके बाद बने राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि कांग्रेस को अपने पार्षदों को एकजुट बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि पूर्व में भी स्थानीय राजनीति में दल-बदल और नए राजनीतिक समीकरण देखने को मिले हैं, ऐसे में वर्तमान घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है।

दुर्ग। नगर निगम दुर्ग की राजनीति में इन दिनों पार्षदों का केरल दौरा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। निगम सभापति श्याम शर्मा की अगुवाई में भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों का एक बड़ा दल केरल रवाना हुआ है। इस दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं, वहीं कांग्रेस खेमे में भी इसे लेकर अंदरूनी चिंता की खबरें सामने आ रही हैं

जानकारी के अनुसार नगर निगम के कुल 38 पार्षद केरल भ्रमण पर गए हैं। इस दल में निगम सभापति श्याम शर्मा, नेता प्रतिपक्ष संजय कोहले सहित भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षद शामिल हैं। बताया जा रहा है कि करीब 26 भाजपा, 8 कांग्रेस और 4 निर्दलीय पार्षद इस दौरे में शामिल हुए हैं।

निगम सभापति श्याम शर्मा का कहना है कि यह दौरा पूरी तरह पार्षदों की आपसी सहमति से आयोजित किया गया है और मानसून के दौरान केरल के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के उद्देश्य से 10 दिन का कार्यक्रम बनाया गया है। सभी पार्षद 3 जुलाई को दुर्ग लौटेंगे।

हालांकि राजनीतिक हलकों में इस दौरे को सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि श्याम शर्मा नगर निगम की राजनीति में अपनी बढ़ती स्वीकार्यता और प्रभाव का संदेश देने में सफल रहे हैं। भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को एक मंच पर लाने की उनकी क्षमता को राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।

सबसे अधिक चर्चा कांग्रेस खेमे को लेकर हो रही है। नगर निगम चुनाव के दौरान और उसके बाद बने राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि कांग्रेस को अपने पार्षदों को एकजुट बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि पूर्व में भी स्थानीय राजनीति में दल-बदल और नए राजनीतिक समीकरण देखने को मिले हैं, ऐसे में वर्तमान घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है।

हालांकि अभी तक किसी भी कांग्रेस पार्षद द्वारा दल बदलने या भाजपा में शामिल होने जैसी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में कांग्रेस में फूट या संभावित राजनीतिक बदलाव संबंधी चर्चाएं फिलहाल केवल राजनीतिक अटकलों और विश्लेषणों तक ही सीमित हैं।

भाजपा महापौर अलका बाघमार की स्थिति को लेकर भी कोई प्रत्यक्ष चुनौती दिखाई नहीं दे रही है। पार्टी संगठन और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच फिलहाल किसी प्रकार के खुले मतभेद सामने नहीं आए हैं।

फिलहाल केरल टूर ने नगर निगम की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह दौरा केवल पर्यटन तक सीमित रहता है या फिर इसके राजनीतिक प्रभाव भी दुर्ग की सियासत में देखने को मिलते हैं।


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