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ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 1 जुलाई 2026,  08:49 PM IST
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ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित

वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, जनभागीदारी और सर्कुलर इकोनॉमी पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

250 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, बल्क वेस्ट जेनरेटरों की जवाबदेही और जीरो वेस्ट स्टेट के लक्ष्य पर दिया गया जोर

रायपुर/ छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस, रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण एवं पर्यावरण अनुकूल निस्तारण सहित नियमों के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने कहा कि स्वच्छ एवं स्वस्थ शहरों के निर्माण के लिए ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण तथा वैज्ञानिक प्रबंधन में नागरिकों, स्थानीय निकायों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

क्षेत्रीय अधिकारी श्री पी.के. रबड़े ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रावधानों, विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित नियम केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिनका उद्देश्य कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत बल्क वेस्ट जेनरेटरों को अपने द्वारा उत्पन्न कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की जिम्मेदारी स्वयं निभानी होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने स्वच्छता दीदियों के माध्यम से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का सफल मॉडल विकसित किया है। साथ ही बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सीमेंट संयंत्रों में नगरीय ठोस अपशिष्ट से तैयार आर.डी.एफ. (Refuse Derived Fuel) का ईंधन के रूप में उपयोग कर कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी हितधारकों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा सामूहिक प्रयासों से रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को जीरो वेस्ट स्टेट बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

कार्यशाला में राज्य सलाहकार श्रीमती मोनिका सिंह एवं श्री पुरुषोत्तम पंडा (स्वच्छ भारत मिशन), कार्यपालन अभियंता श्री योगेश कुमार कडू, मुख्य रसायनज्ञ श्रीमती नीलिमा सोनकर तथा सहायक अभियंता श्री प्रवीण कुमार नाग ने पॉवरपॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, स्रोत स्तर पर पृथक्करण, प्रसंस्करण तथा व्यावहारिक क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम में शहरी एवं ग्रामीण निकायों के प्रतिनिधि, उद्योग प्रतिनिधि, बल्क वेस्ट जेनरेटर, ईको क्लब समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी-कर्मचारी सहित लगभग 250 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

 कार्यशाला का उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना, विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक एवं प्रभावी कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना था।

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