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यूपी चुनाव: अखिलेश यादव की सोशल इंजीनियरिंग बिगाड़ेगी BJP का खेल? 100 सीटों पर दलित प्रत्याशी उतारेगी सपा
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 5 जुलाई 2026,  11:15 PM IST
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समाजवादी पार्टी और कांग्रेस इस बार के यूपी चुनाव में बीजेपी को पटखनी देने के लिए अपने दलित वोट बैंक में विस्तार करने के लिए आक्रामक चुनावी कैंपेन पर काम कर रही हैं। अखिलेश यादव को उम्मीद है कि उन्हें 2024 के पीडीए वाले फॉर्मूले का 2027 के यूपी चुनाव में भी फायदा मिल सकता है।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दलित वोट बैंक को खास महत्व दे रहे हैं। इसके तहत ही उनकी समाजवादी पार्टी 14 सामान्य सीटों पर अनुसूचित जाति (एससी) के उम्मीदवारों को टिकट देने की योजना बना रही है। अगर अखिलेश यादव इस फैसले टिकट बंटवारे में लागू कर देते हैं तो आरक्षित उम्मीदवारों की कुल संख्या कम से कम 100 हो जाएगी, जिसमें अनुसूचित जातियों के लिए 84 और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए दो सीटें आरक्षित होंगी।

अखिलेश यादव की यह राजनीतिक प्लानिंग उनके पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वाले फॉर्मूले को मजबूत कर रहे हैं। सपा सूत्रों ने बताया कि अनारक्षित सीटों पर दलित उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का विचार उत्तर प्रदेश के दलित समुदाय तक पहुंचने की दिशा में एक कदम है। यह अगले साल होने वाले चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

मायावती के वोट बैंक को अपने पाले में लाने की कोशिश

अखिलेश यादव इस वोट बैंक को साधने पर ध्यान इसलिए भी दे रहे हैं, क्योंकि मायावती के नेतृत्व वाली बसपा राज्य की चुनावी राजनीति से धीरे-धीरे विमुख हो रही है। सपा के ही एक अंदरूनी सूत्र ने कहा, “हम दलित समुदाय से ऐसे उम्मीदवारों की तलाश कर रहे हैं जो सामान्य सीटों पर चुनाव लड़ सकें।”

सपा के नेता ने कहा, “हमारा लक्ष्य दलित समुदाय को 100 सीटें देना है, लेकिन यह योग्य और मजबूत उम्मीदवारों पर निर्भर करेगा। जिन आम सीटों पर दलित उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने की संभावना है, वे वो सीटें हैं, जहां सपा की स्थिति बहुत मजबूत नहीं है।”

2024 में आजमाया था फॉर्मूला

सपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में सामान्य सीटों यानी मेरठ और फैजाबाद पर दो दलित उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। अवधेश प्रसाद ने महत्वपूर्ण फैजाबाद सीट जीतने में कामयाबी हासिल की, जबकि सुनीता वर्मा मेरठ में भाजपा के अरुण गोविल से 10,585 वोटों के मामूली अंतर से हार गईं थीं।

 


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