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ग्राम कुथरेल में सामुदायिक मध्यस्थता अभियान की शुरुआत, ग्रामीणों को दिया गया विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान का संदेश
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 6 जुलाई 2026,  10:49 AM IST
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ग्राम कुथरेल में सामुदायिक मध्यस्थता अभियान की शुरुआत, ग्रामीणों को दिया गया विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान का संदेश

दुर्ग, / राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी "Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India" स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा ग्राम कुथरेल में सामुदायिक मध्यस्थता विषयक जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में न्यायालयीन वादों की संख्या में कमी लाते हुए स्थानीय स्तर पर आपसी संवाद एवं सहमति के माध्यम से विवादों का शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना है।

कार्यक्रम में स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं), दुर्ग की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर तथा वरिष्ठ न्यायालय प्रबंधक ने ग्राम पंचायत भवन में आयोजित बैठक में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, महिला समूहों, पैरालीगल वालंटियर्स (PLVs), युवाओं एवं गणमान्य नागरिकों से संवाद किया।

अपने संबोधन में स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं), दुर्ग की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा ने कहा कि सामुदायिक मध्यस्थता न्यायालयीन प्रक्रिया का विकल्प नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने वाला एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि अधिकांश स्थानीय विवाद संवाद, समझदारी एवं निष्पक्ष मध्यस्थता के माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त किए जा सकते हैं, जिससे समय, धन एवं श्रम की बचत होने के साथ-साथ पारिवारिक एवं सामाजिक संबंध भी सुरक्षित रहते हैं।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने ग्रामीणों को निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, विधिक साक्षरता कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम स्तर पर संवाद आधारित विवाद समाधान की संस्कृति विकसित करना तथा प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय तक सरल एवं त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना है।

बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम के लिए जिले के चयनित ग्रामों में चरणबद्ध रूप से जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, मध्यस्थता उन्मुख कार्यशालाएं एवं जनसंवाद आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण स्वयं अपने छोटे-छोटे विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान करने के लिए प्रेरित हों। कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा का स्वागत करते हुए इसे ग्राम स्तर पर शांति, सद्भाव एवं सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने वाली प्रभावी पहल बताया। ग्रामीणों ने भविष्य में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता का आश्वासन भी दिया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी, पैरालीगल वालंटियर्स, आंगनबाड़ी एवं मितानिन कार्यकर्ता, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं, युवा तथा बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आगामी दिनों में चयनित अन्य ग्रामों में भी इस प्रकार के संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि "वाद-मुक्त ग्रामीण भारत" की परिकल्पना को व्यवहारिक रूप से साकार करते हुए न्याय तक सरल पहुंच, सामाजिक समरसता एवं विवादों के वैकल्पिक समाधान की संस्कृति को व्यापक स्तर पर विकसित किया जा सके।


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