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पूर्व मंत्री अकबर की मुख्य सचिव से मांग: विधायकों और सांसदों के सम्मान वाले 18 आदेशों का हो कड़ाई से पालन
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 3 अगस्त 2026,  07:54 PM IST
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पूर्व मंत्री अकबर की मुख्य सचिव से मांग: विधायकों और सांसदों के सम्मान वाले 18 आदेशों का हो कड़ाई से पालन

छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारियों द्वारा सांसदों और विधायकों के साथ उचित व्यवहार न करने का मुद्दा फिर से गर्मा गया है। राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर ने अधिकारियों के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सीधे मुख्य सचिव से मांग की है कि जनप्रतिनिधियों के सम्मान और उनके द्वारा मांगी गई जानकारी समय पर देने से जुड़े 18 सरकारी आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

18 आदेशों के बाद भी अफसर बेपरवाह

मोहम्मद अकबर ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा है कि सांसदों और विधायकों के साथ अधिकारियों द्वारा अच्छे से पेश आने और तथ्यात्मक जानकारी देने के लिए राज्य सरकार ने समय-समय पर कई परिपत्र (सर्कुलर) जारी किए हैं। कुल 18 ऐसे आदेश मौजूद हैं, फिर भी इनका पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि वे खुद इस मामले में दखल दें और अफसरों से इन आदेशों का पालन करवाएं।

क्या है 21 अप्रैल 2010 का वह आदेश?

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 21 अप्रैल 2010 को जारी एक महत्वपूर्ण आदेश के मुताबिक, शासन के ध्यान में यह बात आई थी कि विभागों और कार्यालयों द्वारा जनप्रतिनिधियों से जुड़े निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिसे शासन ने 'खेदजनक' माना था। इस आदेश के साथ 18 पुराने निर्देशों की एक सूची भी संलग्न की गई थी।

इन पुराने सरकारी आदेशों में मुख्य रूप से ये बातें शामिल हैं:

सांसदों और विधायकों के पत्रों की तुरंत पावती (अभिस्वीकृति) देना।  

प्राप्त पत्रों का अंतरित उत्तर 15 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से देना।  

सरकारी आयोजनों, भूमि पूजन और लोकार्पण आदि कार्यक्रमों में क्षेत्र के विधायक और पूर्व सांसदों को अनिवार्य रूप से आमंत्रित करना।  

जिला और ब्लॉक स्तर पर विकास कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक की जानकारी विधायकों को समय पर देना।  

सांसदों और विधायकों के साथ अधिकारियों द्वारा सौहार्दपूर्ण व्यवहार करना। 

पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर की इस मांग के बाद अब यह देखना अहम होगा कि राज्य का मुख्य सचिव कार्यालय इस पर क्या त्वरित कदम उठाता है और मैदानी अधिकारियों के रवैये में क्या बदलाव देखने को मिलता है।


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