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MP में वनकर्मियों को बड़ी राहत: अब गोली चलाने पर सीधे FIR नहीं, पहले होगी मजिस्ट्रियल जांच
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 8 अगस्त 2026,  10:05 PM IST
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ड्यूटी के दौरान हथियार चलाने की घटना में पहले मजिस्ट्रियल जांच होगी, कार्रवाई जांच में गोली चलाना अनुचित या अनावश्यक पाए जाने पर ही होगी

भोपाल। मध्य प्रदेश में वन विभाग के कर्मचारियों को लेकर सरकार ने एक अहम व्यवस्था की है। अब ड्यूटी के दौरान वनकर्मी द्वारा हथियार चलाने की घटना सामने आने पर उसके खिलाफ सीधे FIR दर्ज नहीं की जाएगी। सबसे पहले मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराई जाएगी। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

नई व्यवस्था के तहत मजिस्ट्रियल जांच में यह देखा जाएगा कि वनकर्मी ने किन परिस्थितियों में हथियार का इस्तेमाल किया और गोली चलाना जरूरी था या नहीं। यदि जांच में कार्रवाई को उचित और नियमों के अनुरूप पाया जाता है तो केवल गोली चलाने के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज नहीं होगा।

अनुचित फायरिंग पर होगी आपराधिक कार्रवाई
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि वनकर्मियों को हथियार चलाने की पूरी छूट मिल गई है। यदि मजिस्ट्रियल जांच में गोली चलाना अनावश्यक, अनुचित या परिस्थितियों के विपरीत पाया जाता है, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।

यानी अब किसी घटना में कार्रवाई से पहले उसकी परिस्थितियों और वनकर्मी की भूमिका की जांच की जाएगी। इससे ड्यूटी के दौरान हथियार इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों को कानूनी प्रक्रिया के स्तर पर सुरक्षा मिलेगी, वहीं गलत तरीके से हथियार चलाने के मामलों में कार्रवाई का रास्ता भी खुला रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत व्यवस्था
वनकर्मियों के हथियार इस्तेमाल करने से जुड़े मामलों में यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के अनुरूप अपनाई जा रही है। इसका उद्देश्य ऐसी घटनाओं में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।

मजिस्ट्रियल जांच के दौरान घटना की परिस्थितियों, हथियार चलाने की जरूरत और संबंधित कर्मचारी की भूमिका जैसे पहलुओं को देखा जाएगा। इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि मामले में आगे आपराधिक कार्रवाई की जरूरत है या नहीं।

वन्यजीव और वन अपराधों से निपटने में काम आते हैं हथियार
वन क्षेत्रों में अवैध शिकार, अतिक्रमण, लकड़ी की तस्करी और अन्य वन अपराधों से निपटने के दौरान वनकर्मियों को कई बार हथियारों का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसे में नई व्यवस्था का असर वन अमले के कामकाज पर भी पड़ेगा।

सरकार की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया में एक तरफ वनकर्मियों को ड्यूटी के दौरान लिए गए जरूरी फैसलों के लिए कानूनी सुरक्षा देने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ हथियार के गलत या अनावश्यक इस्तेमाल पर जवाबदेही भी तय की जाएगी।
 


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