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रीवा में सड़क की बदहाली: बीमार बच्चे को कपड़े की पालकी में ले गए अस्पताल, एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 8 अगस्त 2026,  10:23 PM IST
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रीवा के जवा जनपद की सोहावल खुर्द पंचायत के गढ़ुआई टोला में बारिश के दौरान कच्ची सड़क की हालत बेहद खराब हो जाती है। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाई तो बीमार 12 वर्षीय बच्चे को ग्रामीणों ने कपड़े की पालकी बनाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया।

रीवा जिले के जवा क्षेत्र से सड़क व्यवस्था की बदहाली की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो गांवों में बुनियादी सुविधाओं की हकीकत दिखाती है। गढ़ुआई टोला में बारिश के बाद कच्ची सड़क कीचड़ और पानी से भर गई। इसी दौरान 12 वर्षीय लाला कोल की तबीयत बिगड़ गई। गांव तक एंबुलेंस पहुंचने का रास्ता नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने कपड़े की पालकी तैयार की और बच्चे को किसी तरह मुख्य सड़क तक पहुंचाया। ग्रामीणों का कहना है कि यह परेशानी सिर्फ एक दिन की नहीं, बल्कि हर बारिश में उन्हें इसी तरह की मुश्किलों से गुजरना पड़ता है।

सड़क बनी मुसीबत, बीमार बच्चे को पालकी में ले जाने की मजबूरी
जवा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत सोहावल खुर्द के आदिवासी बहुल गढ़ुआई टोला में सड़क की स्थिति लंबे समय से ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। बारिश के दिनों में कच्चा रास्ता कीचड़ में बदल जाता है। वाहनों का गांव तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

इसी बीच 12 वर्षीय लाला कोल की तबीयत खराब हो गई। उसे तेज पेट दर्द, बुखार, उल्टी-दस्त और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत थी। परिजन और ग्रामीण उसे अस्पताल ले जाना चाहते थे, लेकिन खराब रास्ते के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। आखिरकार ग्रामीणों ने कपड़े की पालकी बनाई और बच्चे को उसमें लेकर मुख्य सड़क की ओर रवाना हुए।

बारिश में पैदल चलना भी मुश्किल
ग्रामीणों के अनुसार बारिश शुरू होते ही गढ़ुआई टोला की सड़क पर जगह-जगह पानी और कीचड़ जमा हो जाता है। हालत इतनी खराब हो जाती है कि कई स्थानों पर पैदल निकलना भी चुनौती बन जाता है।

ऐसे में यदि गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो उसे खाट, चारपाई या कपड़े की पालकी के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में सबसे ज्यादा परेशानी होती है।

वर्षों से सड़क निर्माण की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि गढ़ुआई टोला में सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। इसके बावजूद अब तक पक्की सड़क का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

बारिश में समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बेहतर होने से न केवल रोजमर्रा का आवागमन आसान होगा, बल्कि आपात स्थिति में एंबुलेंस और अन्य वाहन भी गांव तक पहुंच सकेंगे।

ग्रामीणों ने बताई अपनी परेशानी
ग्रामीण कमलेश कोल के मुताबिक बारिश के दौरान सड़क की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। बीमार व्यक्ति को वाहन से अस्पताल ले जाना संभव नहीं रहता। इसी वजह से बच्चे को कपड़े की पालकी में ले जाना पड़ा।

रजिया साकेत ने बताया कि गढ़ुआई टोला में सड़क की समस्या काफी पुरानी है। बारिश के दिनों में बच्चों और बुजुर्गों को गांव से बाहर ले जाना मुश्किल हो जाता है।

वहीं, गंगाराम प्रजापति ने कहा कि सड़क नहीं होने के कारण बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग की है।

कलेक्टर ने दिया जांच और कार्रवाई का भरोसा
मामले को लेकर कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने कहा कि गढ़ुआई टोला की सड़क की स्थिति की जानकारी संबंधित अधिकारियों से ली जाएगी। मौके का निरीक्षण कराकर वास्तविक स्थिति का आकलन कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्था के निर्देश दिए जाएंगे। सड़क निर्माण को लेकर संबंधित विभाग से प्रस्ताव और कार्रवाई की जानकारी ली जाएगी। समस्या के समाधान के लिए नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

ग्रामीणों की मांग- जल्द बने पक्की सड़क
गढ़ुआई टोला के ग्रामीणों ने कलेक्टर से सड़क का जल्द पक्कीकरण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से आदिवासी बस्ती का मुख्य मार्ग से संपर्क बेहतर होगा और बारिश के दौरान मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के साथ रोजमर्रा के आवागमन में भी बड़ी राहत मिलेगी। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है।


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