• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क और भी
लोकधुनों और लोकगाथाओं से सजेगा रायपुर का ‘लोकरंग पर्व
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 6 सितम्बर 2026,  02:37 PM IST
  • 187
लोकधुनों और लोकगाथाओं से सजेगा रायपुर का ‘लोकरंग पर्व

6 से 8 सितंबर तक मुक्ताकाशी मंच पर दिखेगी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, भरथरी-पंडवानी से लेकर पंथी, करमा, सुआ और ददरिया तक की होंगी मनमोहक प्रस्तुतियां

रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, लोकगाथाओं और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को मंच देने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘विभागीय आयोजन 2026’ के अंतर्गत तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। यह सांस्कृतिक आयोजन 6, 7 एवं 8 सितंबर को रायपुर स्थित मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में आयोजित होगा। कार्यक्रम प्रत्येक दिन शाम 7 बजे से प्रारंभ होगा।

लोकरंग पर्व के माध्यम से छत्तीसगढ़ की विविध लोक विधाओं को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन में प्रदेश की पारंपरिक लोकगाथाओं, लोकनाट्य, लोकगीत और लोकनृत्य की ऐसी रंगारंग प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी, जो छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू और उसकी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत करेंगी।

*भरथरी और पंडवानी से लेकर पंथी-करमा तक*

तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोक विधाओं भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा और गम्मत की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इनके साथ सुआ, करमा और पंथी जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां भी दर्शकों को छत्तीसगढ़ की लोकजीवन से जोड़ेंगी।

वहीं बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत और संस्कार गायन जैसी लोक एवं पारंपरिक गायन शैलियों की प्रस्तुतियों के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और लोक परंपराओं की गहराई को सामने लाया जाएगा।

*लोक कलाकारों को मिलेगा मंच, नई पीढ़ी तक पहुंचेगी विरासत*

‘लोकरंग पर्व’ केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सदियों पुरानी लोक सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। लोकगीतों, लोकगाथाओं और पारंपरिक नृत्य-नाट्य शैलियों के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं जनजातीय जीवन, सामाजिक परंपराओं और लोक आस्थाओं की झलक दर्शकों को देखने मिलेगी।

आयोजन में पारंपरिक लोक विधाओं के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर साकार करेंगे। लोक वाद्यों की धुन, पारंपरिक गीतों की मिठास और लोकनृत्यों की लय से मुक्ताकाशी मंच तीन दिनों तक छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आएगा।

*मुक्ताकाशी मंच पर तीन शाम संस्कृति के नाम*

संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश की लोककलाओं और लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आम नागरिकों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। 6 से 8 सितंबर तक शाम 7 बजे से होने वाली प्रस्तुतियों में दर्शकों को छत्तीसगढ़ की अलग-अलग लोक विधाओं का विविधतापूर्ण संगम देखने को मिलेगा।

‘लोकरंग पर्व’ के जरिए छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर रायपुर के मुक्ताकाशी मंच पर उभरेगी, जहां लोकगाथाओं की कथात्मकता, लोकगीतों की मिठास, नृत्यों की थिरकन और पारंपरिक वाद्यों की गूंज मिलकर प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करेगी।


Add Comment


Add Comment






ताज़ा समाचार और भी
Get Newspresso, our morning newsletter