• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क और भी
समान नागरिक संहिता- छत्तीसगढ़ में ड्राफ्टिंग तेज
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 7 सितम्बर 2026,  09:30 PM IST
  • 246
समान नागरिक संहिता- छत्तीसगढ़ में ड्राफ्टिंग तेज

कुलपतियों ने जमीनी सर्वे और अकादमिक शोध पर दिया जोर

रायपुर/ छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यावहारिक, समावेशी और जन-उपयोगी बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा गठित UCC समिति ने जन-परामर्श और विचार-विमर्श की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी कड़ी में समान नागरिक संहिता (UCC)प्रारूप समिति द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री एम. के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या श्रीमती ज्योति रानी सिंह के समक्ष विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और भरण-पोषण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए कुलपति ने खुलकर अपनी राय रखी। बैठक में पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं से लेकर आधुनिक वैधानिक सुधारों तक के कई अहम पहलुओं पर गहन मंथन हुआ।

         बैठक के दौरान प्रदेश के प्रमुख शिक्षाविदों और कुलपति ने कानून निर्माण की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिन्हें UCC समिति ने ड्राफ्टिंग प्रक्रिया में प्राथमिकता से शामिल करने का आश्वासन दिया है। देश के प्रतिष्ठित विधिक संस्थानों में शामिल हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU) के कुलपति प्रोफेसर विवेकानंदन ने पावर पाईट प्रजेन्टेशन देकर समान नागरिक संहिता (UCC) के संबंध में विस्तृत सुझाव दिए। उन्होंने एक मजबूत, निष्पक्ष और न्यायसंगत मसौदा तैयार करने के लिए हर संभव तकनीकी और कानूनी सहयोग देने के लिए हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की ओर से प्रतिबद्धता जताई। एक ऐसा कानून है जो देश के सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या लिंग के भेदभाव के बिना विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक जैसे नियम तय करता है। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार देना और विशेषकर महिलाओं के लिए न्याय व समानता सुनिश्चित करना है।

            पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला ने ड्राफ्ट को शोध-आधारित बनाने के लिए समाजशास्त्र, मानवशास्त्र तथा विधि विभागों के विशेषज्ञों एवं शोधकर्ताओं के इनपुट्स को शामिल करने पर बल दिया। प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक जमीनी सर्वे कराने और आम जनता से सीधे प्रतिक्रिया (जन-फीडबैक) लेने का सुझाव दिया गया, ताकि कानून राज्य की वास्तविक परिस्थितियों और जन-आकांक्षाओं के अनुरूप तैयार हो सके। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज दयाल ने भी इस संबंध में सुझाव दिए।

*समिति ने दिया प्राथमिकता का आश्वासन*

       शिक्षाविदों के इन प्रस्तावों की सराहना करते हुए UCC समिति के सदस्यों, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री एम. के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या श्रीमती ज्योति रानी सिंह ने आश्वासन दिया कि जन-संवाद, अकादमिक शोध और विधिक संतुलन पर आधारित इन सभी सुझावों को अंतिम ड्राफ्ट में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।


Add Comment


Add Comment






Get Newspresso, our morning newsletter