*महाराजा चक्रधर सिंह ने कला को राज-सिंहासन से ऊपर रखा, रायगढ़ घराने को दिलाई विश्व पहचान*
*23 सितम्बर तक रामलीला मैदान में देश-प्रदेश के कलाकार देंगे प्रस्तुतियां*
रायपुर/ राज्यपाल श्री रमेन डेका ने संगीत, नृत्य और कला की समृद्ध परंपरा से जुड़ी रायगढ़ की धरती पर 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह का सोमवार को महाराजा चक्रधर की तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत भव्य शुभारंभ किया। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने समारोह का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल कला प्रस्तुतियों का मंच नहीं, बल्कि महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। 14 से 23 सितम्बर तक रामलीला मैदान में आयोजित समारोह में देश-प्रदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाएं भी गायन, वादन, नृत्य और लोककला की प्रस्तुतियां देंगी।
*राज्यपाल ने कलाकारों का किया सम्मान*
शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका ने समारोह में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों का सम्मान किया। पद्मश्री डॉ. उषा बारले, पद्मश्री श्री अनुज शर्मा सहित अन्य कलाकारों और कला गुरु स्वर्गीय वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों ने प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समारोह की सांस्कृतिक गरिमा को और ऊंचाई प्रदान की।
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि चक्रधर समारोह महाराजा चक्रधर सिंह की कला साधना और उनकी दूरदृष्टि को स्मरण करने का अवसर है। रायगढ़ भारतीय शास्त्रीय कलाओं की महत्वपूर्ण धरोहर भूमि है और रायगढ़ घराने के कथक ने देश ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। महाराजा चक्रधर सिंह ने राजसिंहासन से अधिक महत्व कला को दिया। उन्होंने कलाकारों को संरक्षण दिया और संगीत, नृत्य एवं साहित्य को आमजन के जीवन से जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह की कृतियां ‘नर्तन सर्वस्व’, ‘तालतोय निधि’ और ‘राग रत्न मंजूषा’ आज भी कला और साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उन्होंने अपनी साधना से यह सिद्ध किया कि कला किसी एक स्थान या केंद्र की मोहताज नहीं होती। जहां निरंतर साधना होती है, वही स्थान कला का तीर्थ बन जाता है। रायगढ़ की पहचान आज संगीत, घुंघरुओं की झंकार, तबले की थाप और नृत्य की भाव-भंगिमाओं से जुड़ी है।
राज्यपाल ने कहा कि चक्रधर समारोह अब केवल एक शासकीय या संस्थागत आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह रायगढ़ की सांस्कृतिक धड़कन बन चुका है। देश के प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलना इस समारोह की विशेषता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में अपनी जड़ों के प्रति जुड़ाव पैदा करते हैं। युवाओं को परंपरा के साथ नवाचार को जोड़ते हुए कला को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पंथी, राउत नाचा, भरथरी, सुआ, करमा सहित आदिवासी नृत्य और लोकगीत हमारी सांस्कृतिक विविधता की पहचान हैं। भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता में एकता है और चक्रधर समारोह इसी सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
*विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण जरूरी*
राज्यपाल ने कहा कि विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना भी जरूरी है। रायगढ़ औद्योगिक विकास के साथ-साथ अपनी कला और संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। पिछले वर्ष समारोह ने अपने 40 वर्ष पूरे किए और अब 41वां समारोह नई ऊर्जा और नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। ऐसे आयोजन सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बनते हैं और कला को समाज से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति केवल हमारी पहचान नहीं, बल्कि पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देने का माध्यम हैं। आज के डिजिटल युग में भी नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। अपनी जड़ों से जुड़ाव पिछड़ापन नहीं, बल्कि हमारी पहचान और ताकत है। चक्रधर समारोह अतीत को याद करने के साथ-साथ उस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
*महाराजा चक्रधर सिंह की अमूल्य रचनाओं और ग्रंथों का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी- राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह*
41वें चक्रधर समारोह के पावन अवसर पर राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह ने सभी को गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका की गरिमामयी उपस्थिति के लिए हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके आगमन से समारोह की गरिमा और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह की गौरवशाली परंपरा रही है कि इसका शुभारंभ राज्यपाल के करकमलों से होता है। राज्यसभा सांसद श्री सिंह ने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह का जन्म 19 अगस्त 1905 को हुआ था। उन्होंने ऐसे समय भारतीय कला, संगीत और संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य किया, जब हमारी अनेक सांस्कृतिक परंपराएं अपने मूल स्वरूप से दूर होती जा रही थीं। भारतीय संगीत और कला की उस गौरवशाली परंपरा को, जो मंदिरों, धार्मिक अनुष्ठानों और मांगलिक अवसरों के साथ जनजीवन से जुड़ी रही है, उसके मूल स्वरूप में संरक्षित रखने के लिए महाराजा चक्रधर सिंह ने उल्लेखनीय प्रयास किए। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह केवल एक शासक नहीं, बल्कि भारतीय कला और संस्कृति के महान संरक्षक थे। उनकी रचनाएं और उनके द्वारा सृजित ग्रंथ भारतीय संगीत एवं कला जगत की अमूल्य धरोहर हैं। इन महत्वपूर्ण ग्रंथों का संरक्षण, अध्ययन और व्यापक प्रचार-प्रसार आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस महान सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। राज्यसभा सांसद श्री सिंह ने बताया कि उन्होंने महाराजा चक्रधर सिंह की महत्वपूर्ण रचनाओं और ग्रंथों के संरक्षण एवं प्रकाशन का विषय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी रखा है, जिस पर प्रधानमंत्री ने विशेष रुचि दिखाई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में इन अमूल्य ग्रंथों के प्रकाशन की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार भारतीय संस्कृति, कला और गौरवशाली विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। महाराजा चक्रधर सिंह ने जिस उद्देश्य के साथ भारतीय कला और संस्कृति की महान परंपरा को संरक्षित और समृद्ध किया, उसे आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
*चक्रधर समारोह बढ़ा रहा रायगढ़ की सांस्कृतिक विरासतः लोकसभा सांसद श्री राधेश्याम राठिया*
लोकसभा सांसद श्री राधेश्याम राठिया ने कहा कि चक्रधर समारोह रायगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। महाराजा चक्रधर सिंह ने संगीत और नृत्य के क्षेत्र में जो समृद्ध विरासत रायगढ़ को दी, उसे आगे बढ़ाने में यह समारोह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह को निरंतर नई ऊंचाइयों तक ले जाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
नगर निगम महापौर श्री जीवर्धन चौहान ने अतिथियों और कलाकारों का स्वागत करते हुए आयोजन की सफलता के लिए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, आयोजन समिति, मीडिया एवं रायगढ़वासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह रायगढ़ की कला-संस्कृति की विशिष्ट पहचान है और इसे और ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है।
*संस्कृति समाज की आत्मा और कला उसकी जीवंत अभिव्यक्ति-कलेक्टर*
कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने समारोह में उपस्थित राज्यपाल, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और कला प्रेमियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर निगम, अधिकारी-कर्मचारियों, तकनीकी टीम, स्वयंसेवकों, मीडिया प्रतिनिधियों और कला प्रेमी नागरिकों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्कृति किसी समाज की आत्मा होती है और कला उसकी जीवंत अभिव्यक्ति। चक्रधर समारोह रायगढ़ की इसी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण आयोजन है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सहयोग से समारोह कला और संस्कृति के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां प्राप्त करेगा।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिखा रविन्द्र गबेल, सभापति श्री डिग्री लाल साहू, श्री गुरूपाल भल्ला, श्री श्रीकांत सोमावार, श्री सुभाष पाण्डेय, श्री विकास केडिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, सहायक कलेक्टर श्री गोकुल आर.के, सहित अन्य गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी, कला-संस्कृति से जुड़े लोग और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
*गणेश वंदना से हुई 41 वें चक्रधर समारोह के कार्यक्रम की शुरुआत*
*श्री वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों ने दी मनमोहक प्रस्तुति*
सुर-ताल, छंद और घुंघरुओं की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह-2026 की पहली शाम का शुभारंभ रामलीला मैदान में गणेश वंदना के साथ हुआ। श्री वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना ने समारोह के वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
गणेश वंदना के बाद कलाकारों ने गायन और वादन की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। प्रस्तुति में श्रीमती प्रियंका साहू ने हारमोनियम पर संगत की। कुमारी सुनीता तिवारी, कुमारी ईश्वरी गुप्ता, कुमारी शुभांगी साहू, श्री चवल कुमार पटेल, श्री वेदप्रकाश आदित्य और श्री बसंत यादव ने गायन की प्रस्तुति दी। वाद्य संगीत में श्री देवलाल देवांगन ने पखावज, श्री शान्तनु पटेल ने तबला, श्री किशोर बारीक ने बाँसुरी तथा कुमारी शगुफ्ता बानो ने वायलिन वादन किया। श्री आनन्ददास महंत ने घुंघरू वादन के माध्यम से प्रस्तुति को और आकर्षक बनाया।
कार्यक्रम का निर्देशन श्रीमती प्रियंका साहू ने किया, जबकि श्री सुरेश कुमार चन्देल संयोजक रहे। कलाकारों की सधी हुई प्रस्तुतियों ने समारोह की पहली शाम को सुर और ताल से यादगार बना दिया। रामलीला मैदान में उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
ज्वाला प्रसाद अग्रवाल, कार्यालय शाप न. 2 संतोषी मंदिर परिसर,गया नगर दुर्ग , छत्तीसगढ़, पिनकोड - 491001
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