रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में करीब 13 साल बाद अदालत ने सजा का ऐलान कर दिया है। जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए सभी 10 आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने बुधवार को सजा पर फैसला सुनाया।
5 सितंबर को अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के निर्धारण के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की गई थी। बुधवार को अदालत ने सभी दोषियों को फांसी की सजा सुनाई।
10 दोषियों को मिली मृत्युदंड की सजा
इस मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों में प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, मड़कामी देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतू लेकाम, जोगा मड़कामी और महादेव नागा शामिल हैं। सभी आरोपी वर्तमान में केंद्रीय जेल में बंद हैं। मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी, जिसके बाद शेष 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। NIA ने वर्ष 2015 में करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट पेश की थी और मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।

दीपक बैज ने उठाए सवाल
झीरम को लेकर NIA कोर्ट के फैसले को लेकर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि, जो फैसला आया है उसमें 10 लोगों को मृत्यु दंड की सजा हुई है। वह 10 लोग हैं कौन? यह 10 लोगों वो है जो बड़े नक्सलियों के लिए झोला उठाने वाले ,राशन उठाने का काम करने वाले इनको सजा दी गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है बड़े नक्सली तो सरकार की गोद में है? सरकार के संरक्षण में है उनको सजा कब मिलेगी? फैसला आया लेकिन यहां हमको न्याय नहीं मिला है। असली न्याय तब मिलेगा जब सरकार के षड्यंत्र कारों को फांसी होगी। सरकार अपने बड़े नक्सलियों को बचाने का काम कर रही है। ताकि उनके षड्यंत्र की पोल न खुले। जिनको सजा होनी चाहिए थी उन्हें सजा नहीं हुई।जिन्हें सजा नहीं होनी चाहिए उन्हें हुई है।
हाई कोर्ट के फैसले से मैं संतुष्ट : टीएस सिंह देव
झीरम घाटी मामले में हाई कोर्ट के फैसले पर टीएस सिंह देव ने कहा कि, हाई कोर्ट के फैसले से मैं संतुष्ट नहीं हूं। झीरम घाटी घटना में अभी तक पूरी तरह न्याय नहीं मिल सका है। पार्टी कार्यक्रम प्रभारी के नाते डीजीपी और आईजी कार्यालय को लिखित में सुरक्षा की सूचना दी गई थी। दो दिनों तक कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था रही, लेकिन तीसरे दिन सुकमा जाते समय रास्ते में सुरक्षा नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि, बार-बार सूचना देने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई और हमें नक्सलियों के बीच जाने के लिए छोड़ दिया गया। झीरम घाटी घटना की पूरी जिम्मेदारी तत्कालीन शासन-प्रशासन की है, घटनास्थल पर पर्याप्त सुरक्षा बल क्यों तैनात नहीं था, इसका जवाब मिलना चाहिए।
झीरम घाटी के षड्यंत्रकारियों को हो सजा : जीतू
झीरम घाटी नक्सल कांड में शहीद हुए पूर्व विधायक उदय मुदलियार के पुत्र जीतू मुदलियार का कहना है कि झीरम घाटी में जो नक्सल घटना हुई थी उसमें डेढ़ सौ से अधिक नक्सल शामिल थे। इनमें महज 10 नक्सलियों को सजा हुई है। हमारे द्वारा इस घटना के षड़यंत्र में शामिल लोगों की पहचान किए जाने को लेकर एक एफआईआर भी दरभा थाना में दर्ज कराई गई है। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रदेश सरकार को जांच के लिए निर्देशित किया है, लेकिन आज पर्यन्त तक इसपर कोई एक्शन नहीं हुआ है। श्री मुदलियार ने कहा कि जो नक्सली इस घटना में शामिल थे, उनमें बहुत से नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। सरकार को ऐसे नक्सलियों से उस घटना को लेकर पूछताछ की जानी चाहिए। यदि इस सरकार द्वारा घटना को लेकर जल्द से जल्द जांच नहीं कराई गई तो सुप्रीम कोर्ट में न्याय के लिए लड़ाई लड़ेंगे।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी कांड
25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ का काफिला सुकमा के दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान घात लगाए बैठे माओवादियों ने काफिले को निशाना बनाया। NIA के रिकॉर्ड के अनुसार करीब शाम 4:15 बजे हमला हुआ, जिसमें माओवादियों ने काफिले पर हमला कर भारी गोलीबारी की। हमले में 29 लोगों की मौत और 38 लोग घायल हुए थे। NIA के मुताबिक हमलावरों ने हथियार और अन्य सामान भी लूटे थे।
कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं की हुई थी मौत
झीरम हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई शीर्ष नेता मारे गए। इनमें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं बस्तर के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार और विधायक योगेंद्र शर्मा प्रमुख नाम हैं। हमले में सुरक्षा बलों के जवानों और अन्य कार्यकर्ताओं की भी जान गई। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार विद्याचरण शुक्ल हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में 11 जून 2013 को उनका निधन हुआ।
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