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छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला सस्पेंड; IIT ने मांगी सार्वजनिक माफी
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 21 सितम्बर 2026,  03:43 PM IST
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मुंबई स्थित IIT बॉम्बे में एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग के BTech द्वितीय वर्ष के 22 वर्षीय छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की आत्महत्या के बाद भारी बवाल मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए IIT बॉम्बे प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है और डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के निवासी साहिल वाकोडे का शव शुक्रवार शाम पवई स्थित IIT कैंपस के हॉस्टल में उनके कमरे के पंखे से लटका मिला था। इस घटना के बाद से ही पूरे कैंपस में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। मृतक छात्र के परिवार और साथी छात्रों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आया है।

क्या है पूरा मामला और सुसाइड का कारण?
साहिल एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में पढ़ाई कर रहे थे। जानकारी के मुताबिक, घटना से कुछ घंटे पहले मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान उन्हें कथित तौर पर मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए और AI टूल ChatGPT पर प्रश्न पत्र अपलोड करते पकड़ा गया था। आरोप है कि इसके बाद साहिल पर अत्यधिक मानसिक दबाव बनाया गया और उन्हें संस्थान से निलंबित करने की धमकी दी गई थी, जिससे दुखी होकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।

परिवार के आरोप और पुलिस का एक्शन
साहिल के परिजनों और प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि साहिल को संस्थागत उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव का सामना करना पड़ रहा था। साहिल के माता-पिता की लिखित शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया है। मामले में संबंधित प्रोफेसर को नामजद आरोपी बनाया गया है और आगे की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।

छात्रों का उग्र प्रदर्शन, प्रशासन ने स्वीकार कीं 18 मांगें
घटना के विरोध में 20 सितंबर की देर रात सैकड़ों छात्र IIT बॉम्बे के मुख्य गेट पर एकत्र हो गए और धरना शुरू कर दिया। स्थिति को संभालने के लिए IIT बॉम्बे के डायरेक्टर शिरीष बी. केदारे खुद मौके पर पहुंचे और करीब तीन घंटे तक प्रदर्शनकारी छात्रों से संवाद किया। छात्रों ने आरोपी प्रोफेसर के निलंबन, निष्पक्ष जांच समिति के गठन, पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे और सार्वजनिक माफी की मांग रखी। प्रशासन ने छात्रों की सभी 18 मांगों को स्वीकार करते हुए लिखित सहमति जताई, जिसके बाद प्रोफेसर को निलंबित किया गया।


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