• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
ताज़ा समाचार और भी
नारायणपुर के ग्रामीण अंचल में आजीविका की नई क्रांति
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 28 सितम्बर 2026,  09:05 PM IST
  • 126
नारायणपुर के ग्रामीण अंचल में आजीविका की नई क्रांति

*मावा मीन अभियान*

रायपुर,/ वनांचल जिले नारायणपुर में जल संरचनाओं के बहुउपयोग और ग्रामीण आजीविका को नई ऊँचाइयाँ देने के उद्देश्य से संचालित “मावा मीन अभियान” ग्रामीणों के जीवन में खुशहाली और आर्थिक समृद्धि का नया रंग भर रहा है। कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस अभियान के तहत मनरेगा एवं वीबी-जी राम जी योजना से निर्मित जल संरचनाओं (डबरियों) को मत्स्य पालन से जोड़कर ग्रामीणों को स्वावलंबन की राह दिखाई जा रही है। जिले में कुल 200 डबरियों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 165 डबरियों में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज का सफल संचयन एवं वितरण किया जा चुका है। इस पूरी व्यवस्था में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मत्स्य विभाग द्वारा लाभार्थियों को बीज के साथ-साथ उन्नत तकनीकी मार्गदर्शन भी निरंतर उपलब्ध कराया जा रहा है।

        इस नीली क्रांति और बदलाव की एक जीवंत मिसाल बने हैं ग्राम करलखा के निवासी श्री सुरेन्द्र नाग। शासकीय योजनाओं का सटीक लाभ उठाकर उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मत्स्य पालन को अपनी आजीविका का मुख्य आधार बना लिया है। वर्ष 2022-23 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत उन्होंने अपनी निजी भूमि पर 1 हेक्टेयर जलक्षेत्र में तालाब का निर्माण कराया था। लगभग 7 लाख रुपये की कुल लागत से बने इस तालाब के लिए उन्हें 4.20 लाख रुपये का शासकीय अनुदान मिला, जबकि शेष 2.80 लाख रुपये उन्होंने स्वयं लगाए।

        तालाब निर्माण के बाद मत्स्य विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर सुरेन्द्र नाग ने उत्पादन में नए आयाम स्थापित किए। वर्तमान में वे प्रतिवर्ष लगभग 1,000 से 2,000 किलोग्राम मछली तथा 150 किलोग्राम झींगा का सफल उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उन्हें हर साल करीब 2.50 से 3.50 लाख रुपये की अतिरिक्त शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। अपनी इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2025-26 में 'झींगा सह मछली पालन योजना' के तहत झींगा बीज मिलने के बाद, अब वे मत्स्य एवं झींगा पालन के साथ-साथ कुक्कुट (मुर्गी) पालन भी कर रहे हैं, जिससे उनके आय के स्रोतों में बहुगुणा वृद्धि हुई है।

        अपनी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सुरेन्द्र नाग बताते हैं कि शासकीय सहायता, सही तकनीकी मार्गदर्शन और स्वयं की मेहनत के बल पर ही उन्हें अपने गाँव में आत्मनिर्भर बनने का यह अवसर मिला है। वे अपनी इस आर्थिक मजबूती और स्वावलंबन के लिए राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, जिला प्रशासन एवं मत्स्य विभाग के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। 'मावा मीन अभियान' आज नारायणपुर के सैकड़ों अन्य परिवारों के लिए भी समृद्धि और आत्मनिर्भरता की एक नई किरण साबित हो रहा है।


Add Comment


Add Comment






ताज़ा समाचार और भी
Get Newspresso, our morning newsletter