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राहुल-प्रियंका गांधी ने लूटी महफिल, सहयोगी दलों को क्यों नहीं आया रास
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 7 अक्टूबर 2026,  02:32 PM IST
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चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA ब्लॉक के मार्च में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के आकाशवाणी भवन में धरने ने सबका ध्यान खींचा। सहयोगी दलों का कहना है कि संयुक्त विपक्ष का प्रदर्शन आखिर में राहुल गांधी-कांग्रेस के प्रदर्शन में बदल गया।

दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर तक पहुंचने की कोशिश में INDIA ब्लॉक ने मंगलवार को मार्च निकाला। कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मार्च में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी। दोनों नेताओं ने आकाशवाणी भवन में धरना दिया। हालांकि, कांग्रेस के इस कदम से उसके सहयोगी दल नाराज हैं। कई सहयोगी दलों का मानना है कि मंगलवार का बड़ा विपक्षी प्रदर्शन आखिरकार गांधी भाई-बहन का प्रदर्शन बनकर रह गया।

सहयोगी दलों का कहना है कि राहुल और प्रियंका गांधी ने आकाशवाणी भवन यानी ऑल इंडिया रेडियो के मुख्यालय में धरना देकर पूरा ध्यान अपनी ओर खींच लिया। वहीं, विपक्ष के दूसरे नेताओं को हिरासत में लेकर पुलिस थानों में ले जाया गया।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने INDIA ब्लॉक की दूसरी पार्टियों से कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने उस समय की स्थिति को देखते हुए तुरंत फैसला लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि सहयोगी दलों को भरोसे में नहीं लेने से जो गलतफहमी पैदा हुई, उसका उन्हें अफसोस है।

सहयोगी दलों के नेताओं का कहना है कि जो प्रदर्शन पूरे विपक्ष का संयुक्त प्रदर्शन था, वह बाद में ‘राहुल गांधी शो’ बन गया। कुछ नेताओं ने यह सवाल भी उठाया कि जब प्रदर्शन चुनाव आयोग के खिलाफ था तो कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग से मिलने पर जोर क्यों दिया।

मंगलवार को क्या हुआ?

मंगलवार को करीब 200 विपक्षी सांसद संसद के मकर द्वार पर जुटे। इसके बाद उन्होंने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। विपक्षी सांसद विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

दिल्ली पुलिस ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर जाने वाली सभी सड़कों को घेर रखा था। जब विपक्षी मार्च आकाशवाणी भवन के पास पहुंचा तो समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्ष के कई वरिष्ठ सांसदों को हिरासत में ले लिया गया। उन्हें बसों में बैठाकर पुलिस थानों में ले जाया गया।

‘अचानक’ लिया गया फैसला

कांग्रेस ने गांधी भाई-बहन के आकाशवाणी भवन में जाने और वहां धरना देने के फैसले को ‘अचानक लिया गया कदम’ बताया। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने आकाशवाणी भवन परिसर में जाने और पीछे के गेट से बाहर निकलने की योजना बनाई थी। यह गेट चुनाव आयोग के कार्यालय के ठीक सामने है।

लेकिन पुलिस ने जब पीछे का गेट बंद कर दिया तो राहुल और प्रियंका गांधी के साथ कांग्रेस के दूसरे नेताओं- केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा और इमरान प्रतापगढ़ी ने आकाशवाणी भवन में धरना शुरू कर दिया। वे चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने की मांग कर रहे थे।

गांधी भाई-बहन और उनके साथ मौजूद कांग्रेस नेताओं को देर शाम हिरासत में लिया गया और बाद में छोड़ दिया गया। अब इस मामले में FIR भी दर्ज की गई है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आकाशवाणी भवन में धरना पहले से तय योजना का हिस्सा नहीं था और गांधी भाई-बहन ने अचानक यह कदम उठाया। कांग्रेस के एक नेता ने कहा, ”कांग्रेस नेताओं को भी इस प्रदर्शन की जानकारी नहीं थी। इसलिए सहयोगी दलों को भी इसकी जानकारी नहीं थी।”

कांग्रेस नेताओं ने आकाशवाणी भवन में प्रदर्शन का बचाव करते हुए इसे ‘अचानक हुआ’ कदम बताया। एक कांग्रेस नेता ने कहा, ”हम पहले से कैसे अनुमान लगा सकते थे कि ऐसा होगा? दूसरी पार्टियों के सांसद वापस आ सकते थे और कुछ सांसद वापस आए भी। कांग्रेस ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी सहयोगी दल खुद को इस गठबंधन का हिस्सा महसूस करें।”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे INDIA ब्लॉक के सांसदों के लिए जनपथ स्थित सागर रत्ना रेस्टोरेंट में दोपहर के भोजन का आयोजन करेंगे।

सहयोगी दल क्यों नाराज हैं?

INDIA ब्लॉक की एक सहयोगी पार्टी के नेता ने कहा, ”आज का प्रदर्शन INDIA ब्लॉक का प्रदर्शन था। लेकिन आखिर में यह कांग्रेस और राहुल गांधी का प्रदर्शन बन गया।”

कुछ वरिष्ठ सहयोगी नेताओं ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग से मिलने की मांग करने का कांग्रेस का फैसला ऐसा था जिस पर सहयोगी दल सहमत नहीं होते। एक वामपंथी सांसद ने कहा, ”जब हम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं तो हम चुनाव आयोग से क्यों मिलेंगे? अगर इस बारे में सहयोगी दलों से चर्चा की जाती तो हम इसके लिए सहमत नहीं होते।”


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