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108 एम्बुलेंस सेवा पर सवाल: ₹948 करोड़ के भुगतान की जांच की मांग, लोकायुक्त ने NHM और प्रमुख सचिव से मांगा जवाब
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 13 अक्टूबर 2026,  07:42 PM IST
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108 एम्बुलेंस सेवा के संचालन पर कथित अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता ने 948 करोड़ रुपये के भुगतान, वाहन पंजीकरण और किलोमीटर रिकॉर्ड की जांच मांगी है। लोकायुक्त ने संबंधित विभागों से 25 नवंबर तक प्रतिवेदन मांगा है।

भोपाल। मध्य प्रदेश में 108 एम्बुलेंस और 108 जननी एक्सप्रेस सेवाओं के संचालन में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला लोकायुक्त तक पहुंच गया है। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त कार्यालय ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन संचालक से तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा है। कांग्रेस नेता पुनीत टंडन ने आरोप लगाया है कि एम्बुलेंस संचालन करने वाली कंपनी को वर्ष 2024 तक करीब 948 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन वाहनों के किलोमीटर, मरीजों के रिकॉर्ड, कर भुगतान और अनुबंध की शर्तों के पालन पर सवाल हैं। संबंधित विभागों को 25 नवंबर 2026 तक प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। हालांकि, फिलहाल ये आरोप हैं और किसी अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है।

948 करोड़ रुपये के भुगतान पर उठाए सवाल

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और आईटीआई विभाग के प्रदेश अध्यक्ष पुनीत टंडन ने 108 एम्बुलेंस सेवा के संचालन को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल उठाए थे। इसके बाद पुनीत टंडन ने शपथ-पत्र के साथ लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत एम्बुलेंस सेवाओं का संचालन करने वाली जय अम्बे इमरजेंसी सर्विस को वर्ष 2024 तक करीब 948 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता ने भुगतान के आधार, अनुबंध की शर्तों और सेवा प्रदाता की ओर से दायित्वों के पालन की जांच कराने की मांग की है।कांग्रेस का कहना है कि भुगतान से संबंधित बिलों, अनुबंधों और विभागीय रिकॉर्ड की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सरकारी धन का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के अनुसार हुआ या नहीं।

छत्तीसगढ़ नंबर की एम्बुलेंस चलने का आरोप

शिकायत में मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ पंजीकरण नंबर वाले वाहनों के संचालन का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने ऐसे वाहनों के पंजीकरण, कर भुगतान, संचालन की अनुमति और अनुबंध के प्रावधानों के अनुपालन की जांच की मांग की है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित वाहनों के दस्तावेजों और विभागीय रिकॉर्ड का मिलान जरूरी होगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी वाहन ने नियमों का उल्लंघन किया है

मरीजों का विवरण नहीं, फिर किलोमीटर का भुगतान कैसे?

शिकायत में डिंडोरी और शहडोल जिलों के कुछ रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि उनमें मरीज का नाम, मोबाइल नंबर और कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम जैसी जानकारियां दर्ज नहीं हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, कुछ रिकॉर्ड में केवल एम्बुलेंस के चलने की दूरी का विवरण उपलब्ध है। शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि भुगतान तय किलोमीटर के आधार पर किया जाता है, तो हर यात्रा की पुष्टि किस आधार पर की गई। इसके लिए एम्बुलेंस की लॉगबुक, जीपीएस रिकॉर्ड, मरीज को अस्पताल पहुंचाने के विवरण और भुगतान के दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई है।शिकायतकर्ता ने विदिशा जिले में कुछ एम्बुलेंस के लगभग 500 से 600 किलोमीटर तक चलने का उल्लेख भी किया है। इन आंकड़ों और अन्य जिलों में संचालित एम्बुलेंस की संख्या संबंधी दावों का विभागीय रिकॉर्ड से सत्यापन किया जाना बाकी है।

श्रम कानूनों के पालन की भी जांच की मांग

शिकायत में सेवा प्रदाता पर श्रम कानूनों और अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने कर्मचारियों की नियुक्ति, वेतन भुगतान, ड्यूटी की शर्तों और श्रम कानूनों के अनुपालन की जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा एम्बुलेंस के पंजीकरण, कर भुगतान, यात्राओं के रिकॉर्ड और कंपनी को किए गए भुगतान का लेखा परीक्षण कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जांच में वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

लोकायुक्त ने 25 नवंबर तक मांगा प्रतिवेदन

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, लोकायुक्त कार्यालय ने इस मामले में 5 जून 2026 को भी पत्र जारी कर तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा था। बाद के पत्राचार में प्रतिवेदन प्राप्त नहीं होने का उल्लेख करते हुए संबंधित विभागों से 25 नवंबर 2026 तक जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। पत्र प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग और मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को संबोधित है। दस्तावेजों में प्रतिवेदन मिलने के बाद प्रकरण को आगे प्रस्तुत करने का भी उल्लेख है।महत्वपूर्ण: लोकायुक्त कार्यालय की ओर से प्रतिवेदन मांगा जाना शिकायत पर अंतिम निर्णय या आरोपों के प्रमाणित होने के समान नहीं है। मामले में संबंधित विभागों का जवाब और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

कांग्रेस ने की स्वतंत्र जांच और जवाबदेही तय करने की मांग

कांग्रेस ने 108 एम्बुलेंस और जननी एक्सप्रेस सेवाओं के अनुबंधों तथा भुगतान का स्वतंत्र लेखा परीक्षण कराने की मांग की है। पार्टी के अनुसार, जय अम्बे इमरजेंसी सर्विस को किए गए भुगतान, वाहनों के पंजीकरण और कर संबंधी दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही डिंडोरी, शहडोल और विदिशा समेत सभी जिलों में एम्बुलेंस की यात्राओं, जीपीएस रिकॉर्ड और किलोमीटर आधारित भुगतान का सत्यापन कराने की मांग की गई है।

कांग्रेस ने श्रम कानूनों से जुड़े आरोपों की जांच और लोकायुक्त कार्यालय को समय-सीमा में प्रतिवेदन देने की भी मांग की है। पार्टी का कहना है कि 108 एम्बुलेंस सेवा आम लोगों की आपातकालीन स्वास्थ्य जरूरतों से जुड़ी है। इसलिए इसके संचालन में पारदर्शिता और सरकारी धन के इस्तेमाल की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। अब संबंधित विभागों के जवाब और आगे की जांच से ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।


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