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हाईकोर्ट में अवमानना की याचिका वापस, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा को मिली राहत
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 3 नवम्बर 2026,  01:14 PM IST
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 इधर दुर्ग निगम की स्थापना शाखा का टूटा ताला, फाइलों से छेड़छाड़ ने बढ़ाया सस्पेंस । निगम से मंत्रालय तक चर्चाओं का बाजार गर्म, आखिर पर्दे के पीछे क्या चल रहा है..?

निलंबित कर्मचारी भूपेंद्र गोइर ने वापस ली अवमानना याचिका, निगम से मंत्रालय तक चर्चाओं का बाजार गर्म, आखिर पर्दे के पीछे क्या चल रहा है..?

ज्वाला एक्सप्रेस न्यूज | दुर्ग।

दुर्ग नगर पालिक निगम में इन दिनों घटनाओं की ऐसी कड़ी सामने आ रही है, जिसने निगम मुख्यालय से लेकर रायपुर मंत्रालय तक चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। एक ओर निगम के निलंबित कर्मचारी भूपेंद्र गोइर द्वारा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के खिलाफ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में दायर अवमानना याचिका वापस ले ली गई है, तो दूसरी ओर निगम की स्थापना शाखा का ताला टूटने और महत्वपूर्ण फाइलों से कथित छेड़छाड़ की खबर ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

दोनों घटनाओं का समय एक साथ चर्चा में आने से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। क्या यह महज संयोग है या इन घटनाओं के पीछे कोई ऐसी कहानी है, जिसकी परतें अभी खुलना बाकी हैं..?

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हाईकोर्ट से मिली राहत, लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं!

उच्च न्यायालय बिलासपुर में अवमानना प्रकरण क्रमांक CONT No. 1595/2026 भूपेंद्र गोइर विरुद्ध श्री सोनमणि बोरा की सुनवाई 2 नवंबर 2026 को हुई। मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति प्रतीम साहू की अदालत में हुई।

न्यायालय के आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अवमानना याचिका वापस लेने तथा बेहतर याचिका प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता मांगी। न्यायालय ने इस निवेदन को स्वीकार करते हुए याचिका को Dismissed as Withdrawn with Liberty कर दिया।

इसका स्पष्ट अर्थ है कि अवमानना याचिका वापस ले ली गई है और याचिकाकर्ता को बेहतर याचिका प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी गई है।

यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट ने अवमानना के आरोपों पर गुण-दोष के आधार पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है और न ही इस आदेश को प्रतिवादी की दोषमुक्ति माना जा सकता है। फिर भी प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के लिए फिलहाल इस अवमानना प्रकरण से राहत जरूर मानी जा रही है।

इधर निगम की स्थापना शाखा का टूटा ताला, फाइलों को लेकर बढ़ी बेचैनी!

हाईकोर्ट में अवमानना याचिका वापस लिए जाने की चर्चा के बीच दुर्ग नगर निगम की स्थापना शाखा में ताला टूटने और विभागीय फाइलों से कथित छेड़छाड़ की खबर ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।

विभागीय सूत्रों के हवाले से फाइलों के साथ छेड़छाड़ और संभावित चोरी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अभी तक यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हुआ है कि कितनी फाइलें प्रभावित हुई हैं।

 कौन-कौन से दस्तावेज गायब हैं और घटना के पीछे किन लोगों का हाथ है।

प्रारंभिक स्तर पर पुलिस जांच की बात सामने आ रही है। वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और उसके बाद होने वाली विभागीय जांच से ही स्पष्ट हो सकेगी।

आखिर किसे हो सकता है फायदा..? 

पर्दे के पीछे की कहानी पर सवाल

इन दोनों घटनाओं का एक ही समय में चर्चा में आना कई सवाल खड़े करता है।

क्या स्थापना शाखा में रखी फाइलों में किसी महत्वपूर्ण प्रशासनिक या सेवा संबंधी मामले के दस्तावेज भी शामिल हैं..?

क्या निलंबित कर्मचारी से जुड़े प्रकरण और निगम की स्थापना शाखा की गतिविधियों की कोई कड़ी है..?

क्या किसी को फाइलों के गायब होने या उनमें बदलाव से लाभ मिल सकता है..?

क्या इस पूरे घटनाक्रम के पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति या राजनीतिक संरक्षण की भूमिका है..?

ये सवाल फिलहाल जांच और तथ्यों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। किसी व्यक्ति, अधिकारी या राजनीतिक हस्ती की संलिप्तता का प्रमाण सामने आए बिना किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन प्रशासनिक पारदर्शिता के लिहाज से इन सवालों का जवाब मिलना बेहद जरूरी है।

निगम प्रशासन और मंत्रालय की जवाबदेही तय होनी चाहिए

दुर्ग नगर निगम की स्थापना शाखा में ताला टूटना कोई सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि सरकारी कार्यालय से महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ हुई है, तो यह प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।

अब जरूरत है कि निगम प्रशासन तत्काल विभागीय जांच कराए, संबंधित फाइलों की सूची तैयार करे, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखे और पुलिस जांच में पूरा सहयोग करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि घटना के समय शाखा की जिम्मेदारी किस अधिकारी और कर्मचारी के पास थी।

ज्वाला एक्सप्रेस न्यूज का स्पष्ट पक्ष: इस पूरे घटनाक्रम में किसी भी प्रकार के आर्थिक लेनदेन, आपसी समझौते, राजनीतिक दबाव या पर्दे के पीछे सौदेबाजी की हम पुष्टि नहीं करते हैं। ये केवल घटनाक्रम से उठ रहे सवाल हैं, जिनका जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आना चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाईकोर्ट में अवमानना याचिका वापस होने और दुर्ग निगम की स्थापना शाखा का ताला टूटने के बीच क्या कोई वास्तविक संबंध है या यह महज समय का संयोग? दुर्ग की जनता को जवाब चाहिए और प्रशासन को पारदर्शिता के साथ जांच के नतीजे सामने रखने होंगे।


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