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दुर्ग में विशेष ध्यान साधना शिविर 20 से, देशभर से जुटेंगे क्रियायोगी
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 17 फरवरी 2026,  07:34 PM IST
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दुर्ग में विशेष ध्यान साधना शिविर 20 से, देशभर से जुटेंगे क्रियायोगी

विश्वगुरु स्वामी परमहंस प्रज्ञानानंद महाराज शिविर में क्रियायोगियों का करेंगे मार्गदर्शन

दुर्ग । प्रज्ञानालय क्रियायोग आश्रम एलआईजी-297 पद्मनाभपुर दुर्ग द्वारा 20 फरवरी से 25 फरवरी तक आयोजित विशेष ध्यान साधना शिविर में देशभर से क्रियायोगी जुटेंगे। यह पांच दिवसीय शिविर आदर्श नगर स्थित चौपड़ा पैलेस में आयोजित किया गया है। शिविर में क्रियायोग के विश्वगुरु स्वामी परमहंस प्रज्ञानानंद महाराज पधारेंगे। उनका तीसरी बार दुर्ग में आगमन हो रहा है। जिसके चलते क्रियायोगियों में उत्साह का माहौल है। गुरुदेव शिविर में क्रियायोगियों को विशेष ध्यान साधना की टेकनिक बताएंगे और प्रतिदिन क्रियायोग भगवद्गीता के प्रवचन के माध्यम से क्रियायोगियों का मार्गदर्शन करेंगे। शिविर में गुरुदेव द्वारा 108 दीक्षार्थियों को दीक्षा दिलाई जाएगी। यह दीक्षा समारोह संख्या की दृष्टि से छत्तीसगढ़ में पहला बड़ा दीक्षा समारोह है। दुर्ग प्रवास के दौरान गुरुदेव स्वामी परमहंस प्रज्ञानानंद महाराज विद्यार्थियों और एसटीएफ बघेरा के जवानों से सीधे संवाद करेंगे। जहां विद्यार्थियों को वे परीक्षा के दौरान तनाव से दूर रहने के टिप्स देंगे, वहीं जवानों को तनावमुक्ति का समाधान बताएंगे। गुरुदेव राधाकृष्ण मंदिर महेश कॉलोनी पुलगांव और भिलाई स्थित जगन्नाथ मंदिर भी जाएंगे। यहां वे श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करेंगे। विशेष ध्यान साधना शिविर का शुभारंभ 21 फरवरी को प्रात: 11 बजे स्वामी परमहंस प्रज्ञानानंद महाराज के सानिध्य में प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव करेंगे। इस दौरान अन्य अतिथि व वरिष्ठ क्रियायोगी विशेष रुप से मौजूद रहेंगे। यह बातें क्रियायोग आश्रम पद्मनाभपुर की संचालिका स्वामी धरानंदगिरि ने मंगलवार को मीडिया से चर्चा में कही। इस दौरान आश्रम के अध्यक्ष टीके कुम्भज, सचिव युवराज देशमुख कोषाध्यक्ष दिलीप देशमुख, कार्यकारिणी सदस्य ओमप्रकाश वर्मा, गजानंद गौतम, गंगाधर ठाकरे, प्रहलाद त्रिवेदी, हरीश हरवानी भी मौजूद रहे। चर्चा में क्रियायोग आश्रम पद्मनाभपुर की संचालिका स्वामी धरानंदगिरि ने बताया कि क्रियायोग जीवआत्मा को परमात्मा से एकाकार कराने का सरल मार्ग है। जिसमें मनुष्य को स्वास्थ्य लाभ के साथ ईश्वर से एकाकार होने का एहसास होता है। उन्होनें विशेष ध्यान साधना शिविर के संबंध में बताया कि 20 फरवरी को दोपहर 3 बजे जनता मार्केट पद्मनाभपुर से आश्रम तक भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी। तत्पश्चात सद्गुरु पादुका-पूजन किया जाएगा। 21 फरवरी को सुबह 6 बजे गुरु वंदना, सुबह 10 बजे अतिथियों की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन कर पांच दिवसीय शिविर का शुभारंभ होगा। इस दिन संध्या 6 से 7 बजे तक गुरुदेव द्वारा क्रियायोग भगवद्गीता पर प्रवचन दिया जाएगा, जिसका जन सामान्य लोगों को श्रवण लाभ प्राप्त होगा। तत्पश्चात गुरुदेव महाप्रभु श्री जगन्नाथ मंदिर, सेक्टर-06 जाएंगे। यहां वे शाम 7:15 से रात्रि 8 बजे तक प्रवचन देंगे। 22 फरवरी को प्रात: 7.30 से 11 बजे तक गुरुदेव द्वारा 108 नए दीक्षार्थियों को दीक्षा दिलाएंगे। शाम 6 से रात्रि 7 बजे तक क्रियायोग भगवत गीता का प्रवचन तथा शाम 4 बजे से 5:30 बजे तक राधाकृष्ण मंदिर महेश कालोनी में गुरुदेव की अमृतवाणी होगी। 23 फरवरी को प्रात: 9 से 10:30 बजे तक प्रवचन तथा दोपहर 3-4 बजे तक एसटीएफ कालोनी बघेरा में जवानों का मार्गदर्शन करेंगे। शाम 6 से 7 बजे तक गीता प्रवचन होगा। 24 फरवरी को प्रात: 9 से प्रात: 10 बजे तक गुरुदेव द्वारा सत्संग तथा संध्या 6 से संध्या 7 बजे तक प्रश्नोत्तरी का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। 25 फरवरी को प्रात: 6 से प्रात: 7 बजे तक गुरुवंदना एवं निर्देशित ध्यान तथा प्रात: 9 से दोपहर 12 बजे तक समापन कार्यक्रम एवं होली उत्सव का आयोजन किया गया है। स्वामी धरानंदगिरि ने बताया कि अमर महावतार बाबाजी ने क्रियायोग को पुन: प्रस्तुत किया है, जो जीवन और ध्यान की प्राचीन और दिव्य प्रदत्त पद्धति है। क्रियायोग की शिक्षा और तकनीकें क्रिया गुरुओं की एक परंपरा के माध्यम से गुरु से शिष्य तक सीधे हस्तारित होते आ रही हैं। परमहंस हरिहरानंद महाराज ने 2002 में अपना योगिक शरीर त्याग दिया था, उनके वर्तमान में परमहंस प्रज्ञानानंद महाराज उत्तराधिकारी हैं और इस परंपरा के वे प्रमुख हैं।

स्वामी धरानंदगिरि ने क्रियायोग के लाभ बताते हुए कहा कि क्रियायोग हमें एकाग्रता, आसन और श्वास की प्राचीन तकनीकों का उपयोग करके प्रकाश, कंपन और ध्वनि के तीन दिव्य गुणों को विकसित और अवलोकन करने में मदद करता है, यह एकाग्र मन का विकास करता है, जो हमें चेतना के गहनतम स्तरों में प्रवेश करने में सक्षम बनाता है।

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