धरसींवा। अगर आप भी अपने बैंक कर्मचारी पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं, तो रायपुर के धरसींवा इलाके के नरेंद्र कुमार वर्मा के साथ हुई घटना आपके लिए एक बड़ी चेतावनी है। आई डी बी आई बैंक की चरौदा शाखा में फिक्स डिपॉजिट (एफ़ डी) कराने गए एक मध्यमवर्गीय परिवार की मेहनत की कमाई के 40 लाख रुपये बैंक के ही एक कर्मचारी ने डकार लिए। पुलिस ने मुख्य आरोपी राजा खुंटे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन इस हाई-प्रोफाइल मामले ने बैंक की सुरक्षा प्रणाली और आंतरिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला तब शुरू हुआ जब प्रार्थी नरेंद्र कुमार वर्मा और उनकी पत्नी मनीषा वर्मा ने अपने खातों में जमा 20-20 लाख रुपये (कुल 40 लाख) को सुरक्षित निवेश के लिए फिक्स डिपॉजिट कराने का फैसला किया। बैंक पहुंचने पर उनकी मुलाकात वहां के अस्थायी कर्मचारी राजा खुंटे से हुई। पुराना परिचय होने के कारण नरेंद्र ने उस पर भरोसा किया। आरोपी ने बड़ी ही चालाकी से "बैंक की कागजी प्रक्रिया" का हवाला देते हुए आधार कार्ड, पैन कार्ड की फोटोकॉपी और दो ब्लैंक चेक (हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक) मांग लिए। विश्वास में आकर नरेंद्र ने चेक सौंप दिए, जिसके बदले शातिर आरोपी ने उन्हें बाकायदा एफडी की फर्जी पावती (रसीद) भी दे दी ताकि उन्हें शक न हो।
ऐसे खुला धोखाधड़ी का 'काला चिट्ठा'
जालसाजी का पर्दाफाश तब हुआ जब 2 मार्च 2026 को प्रार्थी को पैसों की सख्त जरूरत पड़ी। उन्होंने राजा खुंटे को फोन कर अपनी एफडी तोड़ने को कहा। फोन पर आरोपी की घबराहट और "पैसों का हेर-फेर हो गया है" जैसे गोलमोल जवाबों ने नरेंद्र के कान खड़े कर दिए। आनन-फानन में जब पीड़ित ने बैंक पहुंचकर अपना स्टेटमेंट निकलवाया, तो उनके होश उड़ गए। बैंक खाते से 40 लाख रुपये गायब थे। रिकॉर्ड से पता चला कि आरोपी ने ब्लैंक चेक का इस्तेमाल कर विकास राव गोडकी और शैलेन्द्री जैसे अपने सहयोगियों के नाम पर अलग-अलग तारीखों में पूरी रकम का आहरण कर लिया था।
मैनेजर और बैंक कर्मी भी जांच की रडार पर
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल बैंक के सिस्टम पर उठ रहा है। पुलिस अधीक्षक रायपुर ग्रामीण के निर्देशन में चल रही इस जांच की सुई अब बैंक के आला अधिकारियों की ओर भी घूम रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इतनी बड़ी रकम का आहरण बिना बैंक मैनेजर और कैशियर की जानकारी या मिलीभगत के होना लगभग असंभव है। आखिर बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने संदिग्ध लेन-देन पर ध्यान क्यों नहीं दिया? क्या केवाईसी नियमों का उल्लंघन जानबूझकर किया गया? पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस सिंडिकेट में बैंक के अंदर से और कौन-कौन शामिल है।
खुलेंगे कई और बड़े राज
रायपुर ग्रामीण पुलिस और थाना प्रभारी राजेन्द्र दीवान की टीम अब फरार सह-आरोपियों की तलाश में जुटी है। कड़ाई से पूछताछ के दौरान यह संकेत मिले हैं कि आरोपी राजा खुंटे ने कई अन्य भोले-भाले ग्राहकों को भी अपना निशाना बनाया होगा। पुलिस को अंदेशा है कि आगामी दिनों में बैंक धोखाधड़ी के कई और चौंकाने वाले मामले सामने आ सकते हैं। फिलहाल मुख्य आरोपी को न्यायालयीन रिमांड पर जेल भेज दिया गया है और बैंक के अन्य कर्मचारियों के संदिग्ध दस्तावेजों की स्क्रूटनी की जा रही है।
टीआई ने दी मामले की जानकारी
इस पूरे मामले को लेकर थाना प्रभारी राजेन्द्र दीवान ने बताया कि, हमने प्रार्थी की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी राजा खुंटे को गिरफ्तार कर लिया है। प्राथमिक पूछताछ में आरोपी ने ब्लैंक चेक के जरिए धोखाधड़ी की बात स्वीकार की है। इस मामले में प्रयुक्त बैंक खातों और ट्रांजैक्शन की बारीकी से जांच की जा रही है। फरार सह-आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें रवाना कर दी गई हैं। साथ ही, बैंक प्रबंधन की भूमिका और सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी की भी तफ्तीश की जा रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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