पाल। प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में महिला अफसरों का दबदबा बढ़ रहा है। राज्य में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में महिला आईएएस अधिकारियों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वर्तमान में प्रदेश के 55 जिलों में से 17 जिलों की कमान महिला आईएएस अधिकारियों के हाथों में है। यह स्थिति इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि पहले कभी इतनी अधिक संख्या में महिलाओं को कलेक्टर के रूप में जिम्मेदारी नहीं मिली थी। राज्य में प्रशासनिक स्तर पर यह बदलाव महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
सरकार का महिला अफसरों पर भरोसा
मुख्यमंत्री मोहन के नेतृत्व में बनी सरकार में महिला अधिकारियों पर भरोसा बढ़ा है और कई जिलों में उन्हें कलेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया है। कुछ जिलों में तो लगातार दो या तीन बार महिला अधिकारियों को ही यह जिम्मेदारी दी गई है। उदाहरण के तौर पर बड़वानी, झाबुआ और डिंडोरी जैसे जिलों में लगातार महिला कलेक्टर नियुक्त की जा रही हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासन में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है और उन्हें महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली जिम्मेदारियों में आगे बढ़ाया जा रहा है।
अहम जम्मेदारियां संभाल रहीं महिलाएं
राज्य में अलग-अलग बैच की महिला आईएएस अधिकारी इस समय कलेक्टर के पद पर काम कर रही हैं। खास तौर पर वर्ष 2014 बैच की महिला अधिकारियों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है। इसके अलावा 2016 बैच की भी कई अधिकारी जिलों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। आने वाले समय में 2011 से 2017 बैच तक की कई अन्य महिला आईएएस अधिकारियों को भी पहली बार कलेक्टर बनने का अवसर मिल सकता है। इससे प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी और भी बढ़ने की संभावना है।
प्रदेश के अनेक जिलों में महिला कलेक्टर
प्रदेश के विभिन्न संभागों में कई जिलों में महिला कलेक्टर कार्यरत हैं। उदाहरण के तौर पर खरगोन, बड़वानी, झाबुआ और आलीराजपुर जैसे जिले इंदौर संभाग में महिला अधिकारियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। इसी तरह उज्जैन संभाग के रतलाम, शाजापुर, आगर मालवा और मंदसौर में भी महिला आईएएस अधिकारी जिलों का नेतृत्व कर रही हैं। इसके अलावा रीवा, पन्ना, निवाड़ी, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, सिवनी और डिंडोरी जैसे जिलों में भी महिला कलेक्टर अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।
योग्यता को मिल रही प्राथमिकता
हालांकि अभी भी प्रदेश के कुछ जिले ऐसे हैं जहां अब तक किसी महिला आईएएस अधिकारी को कलेक्टर के रूप में नियुक्त नहीं किया गया है। इनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, धार, सतना, सिंगरौली और छिंदवाड़ा जैसे जिले शामिल हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इन जिलों में भी महिला अधिकारियों को मौका मिल सकता है। पूर्व अपर मुख्य सचिव अरुणा शर्मा का कहना है कि पहले के समय में महिला आईएएस अधिकारियों की संख्या कम होती थी, इसलिए इतने जिलों में उनकी नियुक्ति संभव नहीं हो पाती थी। अब परिस्थितियां बदल रही हैं। उनका मानना है कि सरकार ने कलेक्टर नियुक्त करते समय कभी महिला और पुरुष के बीच भेदभाव नहीं किया, बल्कि अधिकारियों की योग्यता और कार्यक्षमता को प्राथमिकता दी है।
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