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दुर्ग सिटी कोतवाली क्षेत्र में युवक की हत्या, नशे के कारोबार पर पुलिस की ढिलाई से उठे सवाल
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 12 मई 2026,  12:08 PM IST
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अवैध शराब, सूखा नशा, सट्टा-जुआ के वर्चस्व की लड़ाई? स्थानीय सूत्रों की मानें तो यह पूरा मामला केवल आपसी विवाद नहीं, बल्कि क्षेत्र में अवैध शराब, सूखा नशा, सट्टा और जुए के अवैध कारोबार के वर्चस्व की लड़ाई से जुड़ा हो सकता है। लंबे समय से इस क्षेत्र में खुलेआम नशे का कारोबार संचालित हो रहा है, जिस पर पुलिस प्रभावी अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही है।

दुर्ग सिटी कोतवाली क्षेत्र में युवक की हत्या, नशे के कारोबार पर पुलिस की ढिलाई से उठे सवाल

दुर्ग। दुर्ग सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र एक बार फिर खूनी संघर्ष से दहल उठा। आपसी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और एक युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जबकि अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना सोमवार की बताई जा रही है।

पुलिस के अनुसार मृतक जितेश ठाकुर का आरोपी अक्कू मटिया और युवराज सोनवानी के साथ किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने बैट, बल्ला और डंडों से हमला कर दिया। जितेश ठाकुर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।

वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर चंद घंटों के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस हत्या के इस मामले में आगे की जांच कर रही है।

अवैध शराब, सूखा नशा, सट्टा-जुआ के वर्चस्व की लड़ाई?

स्थानीय सूत्रों की मानें तो यह पूरा मामला केवल आपसी विवाद नहीं, बल्कि क्षेत्र में अवैध शराब, सूखा नशा, सट्टा और जुए के अवैध कारोबार के वर्चस्व की लड़ाई से जुड़ा हो सकता है। लंबे समय से इस क्षेत्र में खुलेआम नशे का कारोबार संचालित हो रहा है, जिस पर पुलिस प्रभावी अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही है।

पूर्व में भी इसी क्षेत्र में गुंडागर्दी, चाकूबाजी और हत्या जैसे गंभीर मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में अपराधियों का अपना अलग कानून चलता है और आम जनता भय के माहौल में जीने को मजबूर है।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब क्षेत्र में अवैध शराब, सट्टा और नशे का कारोबार खुलेआम चल रहा था, तब पुलिस क्या कर रही थी? आखिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हुए कि सरेआम हत्या जैसी वारदात को अंजाम दे दिया गया?

दो लोगों की गिरफ्तारी जरूर हुई है, लेकिन क्या इससे इलाके में जड़ जमा चुके नशे के नेटवर्क पर लगाम लगेगी? या फिर यह कार्रवाई भी केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी?

दुर्ग शहर की कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर यह घटना गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि पुलिस केवल हत्या के आरोपियों तक सीमित रहती है या पूरे अवैध नशा तंत्र पर भी बड़ी कार्रवाई करती है।

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