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देश में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अब आम लोगों को एक और बड़ा झटका लगा है। पेट्रोल-डीजल और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब ब्रेड भी महंगी हो गई है।
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 19 मई 2026,  10:14 AM IST
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देश में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अब आम लोगों को एक और बड़ा झटका लगा है। पेट्रोल-डीजल और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब ब्रेड भी महंगी हो गई है।

देश में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अब आम लोगों को एक और बड़ा झटका लगा है। पेट्रोल-डीजल और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब ब्रेड भी महंगी हो गई है। मुंबई में कई लोकप्रिय ब्रेड ब्रांड्स ने अपने उत्पादों की कीमतों में प्रति पैकेट 5 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। बढ़ी हुई कीमतों का असर सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। 

रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रेड बनाने और पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की लागत लगातार बढ़ रही है। खासतौर पर प्लास्टिक पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन में इस्तेमाल होने वाले इम्पोर्टेड सामान महंगे हो गए हैं। रुपये की कमजोरी ने भी आयात लागत को बढ़ा दिया है, जिसका असर अब बाजार में साफ दिखाई देने लगा है।

आधुनिक रोटी (Modern Bread) ने 16 मई से अपने कई ब्रेड वेरिएंट्स की कीमतें बढ़ा दी हैं। मुंबई के अंधेरी इलाके में दुकान चलाने वाले व्यापारियों के मुताबिक 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड की कीमत 40 रुपये से बढ़कर 45 रुपये हो गई है। वहीं होल व्हीट ब्रेड अब 60 रुपये में मिल रही है, जो पहले 55 रुपये की थी। मल्टीग्रेन ब्रेड की कीमत भी 60 से बढ़कर 65 रुपये पहुंच गई है।

इसके अलावा छोटी ब्राउन ब्रेड और सफेद ब्रेड के दामों में भी 2 से 5 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। बेकरी संचालकों का कहना है कि प्लास्टिक पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल विदेशों से आता है और उसकी कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। ऐसे में दाम बढ़ाना मजबूरी बन गया है।

इंडिया बेकर्स एसोसिएशन से जुड़े बेकरी कारोबारियों का कहना है कि केवल पैकेजिंग ही नहीं बल्कि ट्रांसपोर्टेशन, प्रिजर्वेटिव, नमक और पेट्रोलियम उत्पादों की लागत भी काफी बढ़ गई है। इसका सीधा असर ब्रेड निर्माण लागत पर पड़ रहा है।

उधर ग्राहक भी लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान नजर आ रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि पहले ब्रेड के दाम 2 या 3 रुपये बढ़ते थे, लेकिन अब सीधे 5 रुपये तक की बढ़ोतरी होने लगी है, जिससे घरेलू बजट बिगड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे माल और ईंधन की कीमतों में कमी नहीं आई तो आने वाले दिनों में अन्य खाद्य उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।

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