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खाद्य विभाग की दोहरी नाकामी पर वोरा ने साधा निशाना, तीन माह से गरीबों की शक्कर गायब, ई-केवाईसी भी लंबित
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 24 जून 2026,  10:32 AM IST
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खाद्य विभाग की दोहरी नाकामी पर वोरा ने साधा निशाना, तीन माह से गरीबों की शक्कर गायब, ई-केवाईसी भी लंबित

दुर्ग। प्रदेश में गरीबों के हक पर लगातार डाका डाला जा रहा है। एक तरफ भाजपा सरकार गरीब कल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ लाखों गरीब परिवार पिछले तीन महीनों से राशन दुकानों में मिलने वाली शक्कर के लिए भटक रहे हैं।वहीं जिले में राशनकार्डों में दर्ज 1 लाख 33 हजार 14 सदस्यों की ई-केवाईसी अब तक लंबित है। शासन ने 15 जुलाई तक इसे अनिवार्य रूप से पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। यदि निर्धारित समयसीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो हजारों परिवार राशन व्यवस्था से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

इन गंभीर अव्यवस्थाओं को लेकर पूर्व विधायक अरुण वोरा एवं पूर्व महापौर आरन वर्मा खाद्य विभाग पहुंचे और अधिकारियों से जवाब तलब किया।

अरुण वोरा ने कहा कि सरकार और खाद्य विभाग की लापरवाही का खामियाजा सीधे गरीब और जरूरतमंद परिवार भुगत रहे हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाना है, जिन परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी चुनौती है, उन्हें राशन की मूलभूत सामग्री के लिए भटकाया जा रहा है। तीन-तीन महीने तक शक्कर का वितरण नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है।जिन परिवारों की रसोई पहले ही महंगाई की मार से जूझ रही है, उनसे शक्कर जैसी आवश्यक वस्तु भी छीन ली गई है। वोरा ने सवाल उठाया कि जब शक्कर वितरण महीनों से प्रभावित है तो क्या सरकार और विभाग के अधिकारी केवल कागजों में योजनाएं चलाने तक सीमित हैं?

उन्होंने कहा कि ई-केवाईसी के नाम पर भी गरीबों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।लाखों लोगों की प्रक्रिया लंबित है,प्रक्रिया भी बेहद धीमी गति से चल रही है,समयसीमा नजदीक है, लेकिन विभाग ने जागरूकता और सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए हैं। यदि समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं की गईं तो हजारों पात्र परिवार राशन प्राप्त करने में अनावश्यक परेशानियों का सामना करेंगे।इसका खामियाजा अंततः गरीब जनता को भुगतना पड़ेगा।उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के "सुशासन" की सच्चाई अब राशन दुकानों की कतारों में खड़े गरीबों पर साफ दिखाई दे रही है। सरकार के विज्ञापनों में विकास दिख सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गरीब आज भी अपने हक के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।वोरा ने अधिकारियों से लंबित शक्कर का तत्काल वितरण सुनिश्चित करने, ई-केवाईसी प्रक्रिया को सरल बनाने तथा हितग्राहियों को किसी भी प्रकार की परेशानी से बचाने की मांग की। उन्होंने कहा कि गरीबों के हक़ पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो कांग्रेस जनता की आवाज़ बनकर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।

पूर्व महापौर आरन वर्मा ने कहा कि- गरीबों के अधिकारों से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं है। खाद्य विभाग को तत्काल लंबित शक्कर वितरण सुनिश्चित करना चाहिए तथा ई-केवाईसी प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाना चाहिए, ताकि किसी भी हितग्राही को उसके अधिकार से वंचित न होना पड़े।

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