एक जर्मन निर्माता-निर्देशक द्वारा बनायी गयी इंग्लिश फिल्म ‘Citizen Vigilante’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। इस फिल्म के रिलीज पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद सोशलमीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के मालिक एलन मस्क ने इसे 48 घंटे के लिए ऑनलाइन अपलोड कर दिया। मस्क के ऐसा करते ही फिल्म अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गयी।
ये एक ऐसी एक्शन-थ्रिलर फिल्म है। फिल्म का निर्देशन उवे बोल ने किया है और इसमें एक्टर आर्मी हैमर एक ऐसे अमेरिकी नागरिक माइक सैंडर्स की भूमिका में हैं। फिल्म एक ऐसे शख्स की कहानी दिखाती है, जो प्रवासी अपराधियों और भ्रष्ट न्यायाधीशों के खिलाफ खुद ही न्याय करने निकल पड़ता है।
प्रवासियों और शरणार्थियों को लेकर फिल्म में जो चित्रण किया गया है, उसके कारण जर्मनी में इस फिल्म पर रोक लग गई। जिसके बाद एलन मस्क फिल्म के समर्थन में आए। एलन मस्क ने इस ‘सिटिजन विजिलांटे’ फिल्म को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 48 घंटे के लिए मुफ्त स्ट्रीम किया। जिसके बाद यह फिल्म अचानक विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बन गई।
कथित तौर पर इस फिल्म को जर्मन रेटिंग्स बोर्ड ने प्रवासियों के खिलाफ हिंसा भड़काने के कारण सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था, उसे एलन मस्क की वजह से दुनिया भर में डिस्ट्रिब्यूशन मिल गया है और इसके दर्शकों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। साथ ही इसकी मार्केटिंग और कमर्शियल प्रोफाइल को काफी बढ़ावा मिला।
बता दें कि ‘सिटिजन विजिलांटे’ 19 जून को अमेरिका में क्विवर डिस्ट्रीब्यूशन के जरिए रिलीज हुई थी। वैरायटी की रिपोर्ट के मुताबिक, अब इस कंपनी ने फिल्म के दुनियाभर में वितरण के अधिकार भी हासिल कर लिए हैं। एलन मस्क ने X पर पोस्ट करते हुए फिल्म के अगले पार्ट को भी बढ़ावा दे दिया है। उन्होंने लिखा, “Citizen Vigilante 2 इससे भी बेहतर होगी।”
एक्स पर Citizen Vigilante नाम का एक अकाउंट बनाया गया है। जिसमें फिल्म की कहानी के किरदार माइक सैंडर्स के नाम से लिखा गया, “मैं यह घोषणा कर रहा हूं कि मैंने ‘सिटिजन विजिलांटे’ का यह X अकाउंट बनाया है, ताकि देशभक्त लोग इस्लाम विरोधी नागरिक सतर्कता के बारे में जान सकें। हमारे साथ जुड़िए और इस्लाम तथा घरेलू आतंकवाद को हराने के लिए इस अमेरिकी मिशन का हिस्सा बनिए। हम अपना देश वापस लेकर रहेंगे।”
निर्देशक उवे बोल की यह एक्शन-थ्रिलर यूरोप में सामने आई वास्तविक घटनाओं और सुर्खियों से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म का मुख्य विषय यह है कि जब न्याय व्यवस्था लोगों को न्याय दिलाने में विफल हो जाए, तो क्या आम नागरिकों को कानून अपने हाथ में लेकर अपराधियों को सजा देने का अधिकार होना चाहिए। यही विवादास्पद विचार पूरी फिल्म का आधार है।
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