मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एल नीनो के कारण संभावित कम बारिश की स्थिति से निपटने के लिए सभी विभागों को पहले से तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। सरकार जल आपूर्ति, जल संरक्षण, किसानों के लिए वैकल्पिक फसल योजना और जलाशयों के बेहतर प्रबंधन पर विशेष फोकस करेगी।
भोपाल: मध्य प्रदेश में संभावित कम बारिश और एल नीनो के प्रभाव को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी संबंधित विभागों को पहले से व्यापक तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि राज्य के किसी जिले में सामान्य से कम वर्षा होती है तो उससे उत्पन्न होने वाली हर स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कंटीजेंसी प्लान तैयार रखा जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश
प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में वैकल्पिक जल स्रोतों की पहचान की जाए। साथ ही जरूरत पड़ने पर टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी पहले से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि लोगों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि अमृत 2.0 योजना के तहत चल रही सभी पेयजल परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा किया जाए। इसके अलावा नल-जल योजना के अंतर्गत क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत के लिए 90 दिन का गांववार समीक्षा अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के जरिए खराब पाइपलाइनों की पहचान कर उन्हें जल्द दुरुस्त किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध पेयजल आपूर्ति बनी रहे।
कृषि योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए
मुख्यमंत्री ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को ऐसी वैकल्पिक कृषि योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं, जिससे कम पानी में होने वाली फसलों को बढ़ावा दिया जा सके। सरकार दलहन, तिलहन और मोटे अनाज जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कंटीजेंसी प्लान तैयार कर रही है।
जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर और गांधी सागर जैसे प्रमुख जलाशयों के संचालन में निर्धारित 'रूल कर्व' का सख्ती से पालन किया जाएगा। जल उपयोग की तय प्राथमिकताओं का पालन करते हुए सबसे पहले पेयजल उपलब्ध कराने और उसके बाद बिजली उत्पादन को प्राथमिकता दी जाएगी।
जल डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में जल संसाधनों की निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए जल डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से जलाशयों के जलस्तर, जल उपलब्धता और संभावित जल संकट की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी। साथ ही समय रहते चेतावनी मिलने से प्रशासन आवश्यक कदम उठा सकेगा। सरकार का मानना है कि समय रहते की गई तैयारी से कम बारिश की स्थिति में भी पेयजल, सिंचाई और कृषि पर पड़ने वाले असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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