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CBI ने दाखिल की चार्जशीट, पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह पर दहेज मृत्यु और क्रूरता के आरोप
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 17 अगस्त 2026,  10:12 PM IST
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भोपाल के ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI ने जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु, क्रूरता, आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण और दहेज की मांग समेत कई धाराओं में आरोप लगाए गए हैं।

भोपाल: चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच पूरी करने के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु, क्रूरता और आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण समेत कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।

CBI के मुताबिक, गिरिबाला सिंह पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2), 85, 108 और 3(5) के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ ही दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 भी लगाई गई हैं। धारा 80(2) दहेज मृत्यु, धारा 85 महिला के साथ पति या उसके रिश्तेदार द्वारा क्रूरता और धारा 108 आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण से संबंधित है। धारा 3(5) साझा आपराधिक कृत्य में जिम्मेदारी से जुड़ी है।

सेकंड पोस्टमार्टम के बाद CBI को सौंपी गई थी जांच
ट्विशा शर्मा की मौत के बाद मामले की प्रारंभिक जांच हुई थी। बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद मामले की जांच CBI को सौंप दी गई।
जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल की। इसमें आरोपियों के बीच संपर्क, मोबाइल और अन्य डिजिटल साक्ष्य, आवाज के नमूने तथा फोरेंसिक जांच शामिल रही। CBI ने इन जांचों के आधार पर अभियोजन के लिए चार्जशीट अदालत में पेश की है।

गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह न्यायिक हिरासत में
इस मामले में पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह आरोपी हैं। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले विशेष अदालत ने गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने मामले में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया था।
CBI की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी आरोप मात्र हैं और अदालत में इनका साबित होना बाकी है।

डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्य अहम
मामले में CBI ने डिजिटल साक्ष्यों के साथ-साथ आवाज के नमूनों और दूसरे फोरेंसिक पहलुओं की भी जांच की है। जांच एजेंसी की ओर से जुटाए गए इन साक्ष्यों का परीक्षण अब अदालत की कार्यवाही के दौरान होगा। आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि अभियोजन के आरोपों के समर्थन में पेश साक्ष्य कितने मजबूत हैं।


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