केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर देशव्यापी आतंकवाद-रोधी कार्रवाई की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सुरक्षा बलों ने मोदी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत पाकिस्तान स्थित आतंकी शहजाद भट्टी नेटवर्क के नापाक मंसूबों को समय रहते पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया है।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश में अशांति और विध्वंसक हमलों को अंजाम देने की फिराक में लगे इस सिंडिकेट के खिलाफ विभिन्न राज्यों की पुलिस, स्पेशल टास्क फोर्स और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने मिलकर रियल-टाइम इनपुट के आधार पर यह बड़ा ऑपरेशन चलाया।
14 राज्यों में दबिश, आईईडी और पाकिस्तान मार्किंग वाले ग्रेनेड बरामद
गृह मंत्रालय के अनुसार, 14 राज्यों में चलाए गए इस व्यापक अभियान के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने 200 से अधिक गुर्गों को गिरफ्तार किया, जबकि 80 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। छापेमारी के दौरान संदिग्धों के ठिकानों से इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस (IED), भारी मात्रा में जिंदा कारतूस, अत्याधुनिक विदेशी पिस्तौलें और पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री की मुहर लगे ग्रेनेड जब्त किए गए हैं।
इसके अलावा संवेदनशील ठिकानों की निगरानी और जासूसी के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी बरामद किए गए हैं, जो सीधे सीमा पार सीमावर्ती हैंडलर्स से जुड़े थे।
असम पुलिस की एसटीएफ जांच से खुली थी आतंकी सिंडिकेट की पोल
इस आतंकी नेटवर्क के तार असम के नलबारी में हुई एक खुफिया जांच से जुड़े थे। इसके बाद 24 और 25 जुलाई को असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने धुबरी, चिरांग और बारपेटा में स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई कर पाकिस्तान स्थित नेटवर्क से जुड़े तीन संदिग्धों को दबोचा था। तलाशी में 5 मोबाइल फोन, 7 सिम कार्ड, बैंक पासबुक और पहचान से जुड़े अन्य जरूरी दस्तावेज मिले थे।
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रणब कुमार पेगू ने खुलासा किया था कि यह नेटवर्क भारत के युवाओं का ऑनलाइन ब्रेनवॉश करने, अवैध हथियारों की तस्करी, फंड जुटाने, जासूसी और स्लीपर सेल तैयार करने में जुटा था।
खालिस्तानी और आतंकी फ्रंट संगठनों का मुखौटा बनाकर चल रही थी साजिश
जांच में सामने आया कि शहजाद भट्टी नेटवर्क एनक्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए सीधे आईएसआई के हैंडलर्स के संपर्क में था। अपनी असली पहचान और सीमा पार संपर्कों को छिपाने के लिए नेटवर्क कई मुखौटा संगठनों की आड़ ले रहा था।
इनमें खालिस्तान आर्म्ड फोर्स, पंजाब सॉवरेनिटी अलायंस, खालिस्तान लिबरेशन आर्मी, शेर-ए-पंजाब ब्रिगेड, यूनाइटेड सिख ब्रदरहुड, सिख टाइगर्स ऑफ खालिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (TTH) शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, टीटीएच ने 22 फरवरी और 24 मई को पंजाब पुलिस के जवानों की टारगेट किलिंग की जिम्मेदारी भी ली थी।
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