• +91 99935 90905
  • amulybharat.in@gmail.com
ताज़ा समाचार और भी
मुर्गी पालन ने बदली रजनी की राह, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम
  • Written by - amulybharat.in
  • Last Updated: 20 सितम्बर 2026,  10:56 AM IST
  • 85
मुर्गी पालन ने बदली रजनी की राह, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम

*सेवा की कहानी*

*राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मिला आर्थिक सहयोग, परिवार की आय बढ़ाने में बनी सहभागी*

*समूह से जुड़कर मिली पूंजी के साथ बढ़ा आत्मविश्वास, अब आजीविका से जुड़े फैसले खुद ले रहीं रजनी*

स्व-सहायता समूह ने खोला आत्मनिर्भरता का रास्ता, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

रायपुर/ जब अवसर और सहयोग साथ मिले तो मेहनत को नई दिशा मिलती है। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पाराघाटी की श्रीमती रजनी केरकेट्टा की कहानी इसकी मिसाल है। कभी परिवार की आर्थिक जरूरतों में सीमित भूमिका निभाने वाली रजनी ने मुर्गी पालन को आजीविका का साधन बनाया और धीरे-धीरे अपने परिवार की आय बढ़ाने में सहभागी बन गईं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े स्व-सहायता समूह ने उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ वह आत्मविश्वास भी दिया, जिसके सहारे वे अब अपनी आजीविका गतिविधि से जुड़े निर्णय स्वयं ले रही हैं।

स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद खुला नया रास्ता

रजनी जीवन ज्योति स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। समूह के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की विभिन्न सहायता व्यवस्थाओं की जानकारी मिली और मुर्गी पालन को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ।

उन्हें सामुदायिक निवेश निधि से 50 हजार रुपये, बैंक लिंकेज के माध्यम से 1 लाख रुपये तथा स्वयं सिद्धा के तहत प्रथम वर्ष में 1.50 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई। आजीविका गतिविधि को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए द्वितीय वर्ष में 1.50 लाख रुपये की राशि का पुनः नवीनीकरण भी किया गया।

इस आर्थिक सहयोग से रजनी ने मुर्गी पालन गतिविधि को विस्तार दिया। समूह से मिलने वाले मार्गदर्शन ने उन्हें व्यवसाय को बेहतर तरीके से संचालित करने और आय के अवसरों को बढ़ाने का भरोसा दिया।

आर्थिक सहयोग के साथ बढ़ा आत्मविश्वास

रजनी बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं मिली, बल्कि आगे बढ़ने का हौसला भी मिला। मुर्गी पालन से जुड़कर वे अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में आगे बढ़ सकीं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।

अब आजीविका गतिविधि से जुड़े निर्णय लेने में उनकी सक्रिय भूमिका है। अपनी मेहनत और समूह के सहयोग से उन्होंने यह विश्वास हासिल किया है कि ग्रामीण महिलाएं भी अपने हुनर और प्रयासों के बल पर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

गांव की महिलाओं के लिए स्व-सहायता समूह बन रहे बदलाव का माध्यम

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। समूहों के माध्यम से नियमित बचत, बैंक लिंकेज और विभिन्न निधियों से आजीविका गतिविधियों के लिए सहयोग उपलब्ध कराया जाता है।

इससे ग्रामीण महिलाएं मुर्गी पालन, पशुपालन, कृषि और अन्य आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर परिवार की आय बढ़ाने में सहभागी बन रही हैं। साथ ही आर्थिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ने से निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी मजबूत हो रहा है।

समूह से मिला सहारा, अपने पैरों पर खड़े होने का मिला अवसर”

श्रीमती रजनी केरकेट्टा ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं और स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग ने उन्हें अपनी आजीविका आगे बढ़ाने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि मुर्गी पालन ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का रास्ता दिया है।

रजनी की यह कहानी बताती है कि जब ग्रामीण महिलाओं को संगठन, पूंजी और मार्गदर्शन का साथ मिलता है, तो वे केवल अपने परिवार की आय बढ़ाने वाली नहीं, बल्कि अपने आर्थिक निर्णय स्वयं लेने वाली आत्मनिर्भर उद्यमी भी बन सकती हैं।


Add Comment


Add Comment






Get Newspresso, our morning newsletter